उत्तराखंड

दून और हल्द्वानी में सुधरेगी सीवर-पेयजल सप्लाई, CM धामी ने दी करोड़ों की योजनाओं को मंजूरी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में जल आपूर्ति, स्वच्छता, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देते हुए कुल ₹17 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह फैसला विभिन्न जिलों में नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित मदद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया।

मुख्यमंत्री ने जनपद नैनीताल की हल्द्वानी शाखा के अंतर्गत 15 वर्ष पुराने पंप सेटों को ऊर्जा दक्ष पंप सेटों से बदलने के लिए ₹3.01 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। इससे नलकूपों पर पानी की आपूर्ति बेहतर होगी और बिजली खपत भी कम होगी।

इसी तरह देहरादून के विधानसभा क्षेत्र रायपुर अंतर्गत रामगढ़ में सीवर लाइन बिछाने के लिए ₹3.11 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना से क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और जलभराव की समस्या कम होगी।

चमोली जिले की ज्योतिर्मठ नगर पालिका में वर्ष 2023 के भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में ढाल स्थिरीकरण कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु ₹10 करोड़ की धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से मंजूर की गई है। यह फैसला उन इलाकों में स्थायी सुरक्षा उपायों को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के आपदा मद में देहरादून तहसील सदर के ग्राम मझाड़ा और कालीगाड के 14 प्रभावित परिवारों को किराये के मकान उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹3.36 लाख की सहायता दी गई है। प्रत्येक परिवार को ₹4,000 मासिक की दर से यह मदद उपलब्ध होगी।

पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मिलम में स्थित नंदा देवी मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए ₹90.16 लाख स्वीकृत किए गए हैं। वहीं रायपुर क्षेत्र के उत्तरांचल प्रेस क्लब को खेल सामग्री खरीदने के लिए ₹5 लाख की सहायता भी मंजूर की गई है।

सरकारी स्वीकृतियों में नलकूपों का आधुनिकीकरण, सीवरेज नेटवर्क विस्तार, भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का स्थिरीकरण और आपदा राहत कार्य प्रमुखता से शामिल हैं। इन योजनाओं से हल्द्वानी, देहरादून, चमोली और पिथौरागढ़ के स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ पहुंचने की उम्मीद है।

मंदिर सौंदर्यीकरण और खेल सुविधाओं पर दिए गए फोकस से सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। विभागों को अब इन राशियों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना होगा ताकि मंजूर योजनाएं जनता तक जल्द पहुंच सकें।

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