JPC की बड़ी सिफारिश: PM और CM को बिना अदालती फैसले के हटाना असंवैधानिक

नई दिल्ली। संयुक्त संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और अन्य मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान पर बड़ा सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बर्खास्तगी के बजाय निलंबन का प्रावधान रखा जाना चाहिए। जेपीसी का मानना है कि बिना अदालती फैसले के किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से हटाना असंवैधानिक होगा।
जेपीसी की मसौदा रिपोर्ट में ज्यादातर हितधारकों की राय ली गई। समिति ने सिफारिश की कि 30 दिन से अधिक हिरासत में रहने पर पद से हटाने के प्रावधान को निलंबन में बदल दिया जाए। इससे कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक व्यक्ति को पद पर रहते हुए अस्थायी रूप से रोका जा सकेगा। रिपोर्ट में दो प्रमुख और तीन सामान्य सुझाव दिए गए हैं। जेपीसी ने कहा कि पद से हटाने के शब्द को पूरी तरह हटाकर निलंबन शब्द का इस्तेमाल किया जाए। यदि मुकदमा आगे नहीं बढ़ता है या व्यक्ति बरी हो जाता है तो निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
समिति ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर भी जोर दिया। जेपीसी के अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य उच्च पदों से जुड़े मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों या फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होगी। पांच वर्ष या उससे अधिक कारावास की सजा वाले अपराधों को गंभीर माना गया है। रिपोर्ट में साफ किया गया कि गंभीर अपराधों की परिभाषा उन धाराओं के आधार पर होनी चाहिए जिनमें न्यूनतम पांच साल की सजा का प्रावधान है।
जेपीसी ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर बल दिया। समिति का कहना है कि निलंबन की व्यवस्था अपनाने से दोनों पक्षों का संतुलन बनेगा न तो दोषी बच पाएगा और न ही निर्दोष का करियर बर्बाद होगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि निलंबन की अवधि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक सीमित रहेगी। दोष सिद्ध होने पर स्थायी बर्खास्तगी का प्रावधान लागू किया जा सकता है। समिति ने सभी पक्षों से सुझाव लेकर यह रिपोर्ट तैयार की है।
जेपीसी की यह सिफारिश संसद में भ्रष्टाचार विरोधी कानून को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सुझाव लागू होते हैं तो उच्च पदों पर जवाबदेही बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी बरकरार रहेगा। समिति ने संसद के दोनों सदनों में इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद जताई है। यह रिपोर्ट भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा सुधार साबित हो सकती है।