
सफर के लिए रेल ज्यादातर भारतीयों को पसंद है। उसकी वजह है उनकी आमदनी और भारतीय रेल की दूर-दूर तक पहुंच। इसके अलावा रेल का टिकट सस्ता भी होता है लिहाजा आम भारतीयों के बजट में आसानी से समा जाता है।
यही वजह है कि भारत में रेल के डिब्बे ठसा-ठस भरे होते हैं जबकि त्यौहारी सीजन में मुसाफिर डिब्बे के बाहर भी लटकने से बाज नहीं आते। कई बार ऐसी तस्वीरें आपको देखने को मिल जाएंगी जो आपके रोंगेटे खडा कर देंगी।
दरअसल वो हादसों को दावत देती हुई होती हैं। ऐसे में इस हकीकत से वाकिफ भारतीय रेल मुसाफिरों को सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का दुर्घटना बीमा देता है। ज्यादातर मुसाफिर सिर्फ 45 पैसा देखकर ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते और यूं हीं टिक कर देते हैं और नॉमिनी का नाम दाखिल नहीं करते।
मुसाफिरों की इस अनदेखी का वो तिकड़मबाज फायदा उठाते हैं जो आपदा को अवसर समझते हैं और लाशों की दलाली करने से भी जिन्हें गुरेज नहीं होता। ये तिकड़मी रेल हादसे की ताक में रहते हैं और उस दुर्घटना में उन रेल मुसाफिरों के कागजात खंगालते हैं जिन्होने रेल टिकट खरीदा था, 45 पैसे के बीमा वाला टिक भी किया था लेकिन नॉमनी का जिक्र नहीं किया था।
बस तिकड़मी गिरोह उसी चूक का फायदा उठाते हैं फर्जी कागजात तैयार करते हैं और 45 पैसे वाले बीमा के 10 लाख का मुआवजा डकार जाते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने रेल हादसों में मुआवजे के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए रेल बीमा के नियम कड़े कर दिए हैं।
अब ऑनलाइन टिकट बुक करते समय नॉमिनी का नाम और पहचान दस्तावेज का पूरा ब्योरा देना होगा। ताकि 45 पैसे में मिलने वाला 10 लाख रुपये का सुरक्षा कवच आसानी से मिल सके। अब ऑनलाइन टिकट बुक करते समय ही नॉमिनी की सही पहचान दर्ज करनी होगी. इससे मुआवजे की रकम सीधे पीड़ित परिवार के बैंक खाते में पहुंचेगी और क्लेम निपटान तेज और आसान हो जाएगा साथ ही साथ असली पीडित परिवार के घाव पर मरहम लगेगी।
लिहाजा अब ध्यान रखें जब भी रेल टिकट बुक करें ‘Travel Insurance’ ऑप्शन पर Yes करें, नॉमिनी का नाम अवश्य लिखें। संबन्ध का जिक्र करें और उसकी उम्र क्या है ये भी फिल करें। ताकि फर्जी क्लेम पर रोक लग सक




