दवाइयों की मनमानी कीमतों पर लगाम! NPPA ने तय किए 30 दवाओं के दाम, देखें पूरी रेट लिस्ट

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तीस जरूरी दवाओं की खुदरा कीमतें निर्धारित कर दी हैं, जिससे आम जनता को इलाज में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले के दायरे में विटामिन डी-3, कैल्शियम, विटामिन सप्लीमेंट, मधुमेह रोधी दवाएं, हृदय रोग की दवाएं और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के समय इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाएं शामिल की गई हैं।
आदेश के अनुसार, कुछ चुनिंदा फॉर्मूलेशन के लिए तय की गई इन कीमतों को नई दवा की श्रेणी में रखा गया है। स्पष्ट किया गया है कि इस निर्धारित कीमत में अभी जीएसटी को शामिल नहीं किया गया है, इसे केवल तभी जोड़ा जा सकता है जब सरकार को इसका भुगतान किया जा चुका हो या यह देय हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दवाओं की मांग बाजार में लगातार बनी रहती है, इसलिए रिटेल प्राइस तय होने से मरीजों को राहत मिलने के साथ-साथ दवाओं की कीमतों में होने वाली मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी।
नए नियमों के तहत विभिन्न गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतें तय की गई हैं, जिसमें मधुमेह की दवा एम्पाग्लिफ्लोजिन, सिटाग्लिटिन और मेटफॉर्मिन की प्रति टैबलेट कीमत 14.88 रुपये निर्धारित की गई है, जबकि ग्लिप्रिजाइड और मेटफॉर्मिन के संयोजन वाली टैबलेट की कीमत 11.91 रुपये होगी।
इसी तरह, हाइपरटेंशन और हृदय रोग में काम आने वाली दवा बाइसोप्रोल फ्यूमरेट और एमलोडिपिन की प्रति टैबलेट कीमत 9.40 रुपये तय की गई है, और अंग प्रत्यारोपण में उपयोग होने वाले टाक्रोलिमस प्रोलॉन्ग्ड रिलीज कैप्सूल की एक टैबलेट की कीमत 127 रुपये निर्धारित की गई है।
इसके अलावा, हड्डी रोग की दवाओं में विटामिन-डी 3 ओरल सॉल्यूशन की कीमत 14.91 रुपये तय की गई है और लिपिड मैनेजमेंट में प्रयोग होने वाली दवा एटोरवास्टैटिन और फेनोफाइब्रेट की प्रति टैबलेट कीमत 18.46 रुपये रखी गई है। एलर्जी के इलाज में दी जाने वाली दवा बिलास्टिन और मोंटेलुकास्ट की कीमत भी 21.22 रुपये तय की गई है, जबकि आईवी फ्लूइड की कीमतों की समीक्षा के लिए एनपीपीए ने विशेषज्ञों से राय मांगी है।
सरकार के इस नए आदेश के मुताबिक, अब सभी रिटेल और होलसेल दवा विक्रेताओं को अपनी दुकानों पर इन दवाओं की नई कीमतों की सूची को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना होगा। यदि कोई भी विक्रेता तय की गई निर्धारित कीमत से अधिक पैसा वसूलता पाया जाता है, तो उस पर सख्त ब्याज के साथ पैसा जमा कराया जाएगा और संबंधित मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कानूनी व कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
NPPA के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे दवा खरीदते समय पट्टी या डिब्बे पर लिखी एमआरपी को जरूर देखें। यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक तय एमआरपी से ज्यादा दाम मांगता है, तो इसकी शिकायत एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट nppa.gov.in पर आसानी से दर्ज कराई जा सकती है।
इसके अलावा, दवा निर्माता कंपनियों को भी आदेश दिया गया है कि वे तय कीमतों के अनुसार ही पूरे पत्ते की कीमत तय करें और इसकी जानकारी फॉर्म-4 में इंटीग्रेटेड फार्मास्युटिकल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम पर तुरंत अपलोड करें।




