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500 रुपए वाला आंदोलन: शराब विरोध या चुनावी गेम?

सूबे का आबकारी महकमा अपने तय लक्ष्य हासिल करने में रातदिन जुटा हुआ है ताकि उसके राजस्व कलेक्शन से राज्य में विकार की रफ्तार तेज हो सके। लेकिन तथाकथित आंदोलनकारी उसकी चाल में ब्रेक लगाने की भरसक कोशिश किए हुए हैं। ये बात इसलिए कही जा रही है देहरादून के कैनाल रोड़ पर आवंटित मदिरा की दुकान को न खुलने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया जा रहा है।

नए-नए नेता अपनी नेतागिरी चमकाने के चक्कर में सरकारी नियम कानून की अवहेलना तो कर ही रहे हैं बेहिचक कानून को भी हाथ में लेने की हिमाकत कर रहे हैं। न संविधान का डर न नियमो का भय। महिलाओं की आड़ में हो रहे निर्भय। बहरहाल पहले शराब की दुकान के आगे नेतागिरी का वीडियो वॉयरल हुआ और अब नया ऑडियो सोशल मीडिया में बड़ी तेजी से दौड़ रहा है। जिसमे कहा जा रहा है कि दुकान को बंद कराने के लिए सिर्फ शाम से काम नहीं चलेगा, दिन में भी आना पड़ेगा।

वायरल ऑडियो में हर घर से पैसा कलैक्शन की सलाह दी जा रही है. कहा जा रहा है कि 500-500 रुपए हर घर से लिए जाएं ताकि आंदोलन का खर्चा पानी चल सके। लेकिन इसमें ये नहीं बताया जा रहा है कि कितने घरों से 500-500 रूपए इकट्ठे किए जाएंगे। बहरहाल रुपए कलैक्शन की बात पैनी नजर रखने वालों को हजम नहीं हो रही है। ऐसे तबके का मानना है कि जनआंदोलन स्वतस्फूर्त होते हैं इसमें जनता ही ताकत होती है जनता खुद जुड़ती है और किसी सहूलियत की हसरत नहीं रखती उसकी निगाह लक्ष्य पर होती है पैसे पर नहीं।

लेकिन जो ऑडियो वॉयरल हुआ है उसमें पैसे कलैक्शन का ब्लूप्रिंट तैयार हो गया है सिर्फ तय ड्राफ्ट पर काम होना बाकी है। नेता जी तय करेंगे तो मुहल्ले से लेकर सड़क तक सबको माप लिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठना लाजिम है कि पैसा किसके लिए, आंदोलन के लिए या आने वाले चुनावी खर्च के लिए! सवाल ये भी है अगर दुकान स्थान्तरित न हुई यही पर रही तो फिर उस पैसे का क्या होगा बट्टे खाते में जाएगा या जिसके पास आएगा वहीं डकार जाएगा।

बहरहाल जो भी होगा ये देखा जाएगा फिलहाल कैनाल रोड की शराब दुकान सबकी निगाहों में आ गई है. चाहने वालों के भी और विरोध करने वाले लोगों की भी। दुकान के आस-पास जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे सुलग रहे हैं तो जनसरोकार की हांडी में सियासत की खिचड़ी पक रही है और नेतागिरी उसकी खुशुबू से महक रही है। जबकि पास के किसी घर से पंकज उधास की गजल म्यूजिक सिस्टम पर थिरक रही है “हुई महंगी बहुत शराब कि, थोड़ी थोड़ी पिया करो…….।“

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