
देहरादून में कुल्हाल और डांडा लखौंड स्थित अंग्रेजी मदिरा की दुकानें इन दिनों आबकारी विभाग के कड़े नियमों को ताक पर रखकर सरेआम मनमानी, अवैध वसूली और गुंडागर्दी का मुख्य केंद्र बन चुकी हैं। इन दोनों बदनाम ठेकों पर सरकारी तय दामों से काफी ऊंचे दामों पर शराब बेचना मानो यहाँ के सेल्समैनों और ठेकेदारों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है, जिसके कारण आए दिन शराब के शौकीनों और दुकान के कर्मचारियों के बीच तीखी बहस, तू-तू मैं-मैं और भारी हंगामा देखने को मिलता है।
यदि कोई जागरूक ग्राहक इस नाजायज मुनाफे या सरकारी रेट से ज्यादा पैसे वसूलने पर सवाल उठाने की हिम्मत दिखाता है, तो ठेकेदार के आदमी तुरंत अपनी मर्यादा भूलकर तू-तड़ाक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगते हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती, कई बार तो ये सेल्समैन ग्रुप बनाकर ग्राहकों के साथ सरेआम बदतमीजी करते हैं और उन पर हाथ उठाने यानी मारपीट करने तक पर उतारू हो जाते हैं, जिससे सीधा-साधा ग्राहक खुद को असहाय महसूस करने लगता है।
हालांकि, समाज में लोक-लाज और बदनामी के डर से कई मजबूर खरीदार मामले को ज्यादा बढ़ाना नहीं चाहते और ठेके वाले जो भी मनमाना दाम मांगते हैं, उसे चुपचाप चुकाकर चले जाते हैं, लेकिन जो लोग इस अवैध खेल का विरोध करते हैं उन्हें ‘लेनी है तो लो, वरना दफा हो जाओ या आगे का रास्ता नाप लो’ जैसे कड़े और अपमानजनक डायलॉग सुनने को मिलते हैं।
भारत में शराब पीने को आज भी सामाजिक रूप से छिपाकर रखे जाने वाली आदत माना जाता है, और इसी मजबूरी का पूरा फायदा उठाकर ये दुकानदार ग्राहकों की जेब पर खुलेआम डाका डाल रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आबकारी महकमा या तो इस पूरी मनमर्जी से अनजान बना बैठा है या फिर सब कुछ जानकर भी कोई सख्त एक्शन नहीं ले रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सांठ-गांठ की गंभीर तोहमत लग रही है।
अतः अब समय आ गया है कि आबकारी विभाग अपनी गहरी नींद से जागे और इन बेलगाम ठेकेदारों पर तत्काल कानूनी नकेल कसे, ताकि कानून का राज कायम हो सके और सुकून ढूंढने वाले ग्राहकों का मूड मस्त बना रहे।




