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उत्तराखंड परिवहन में बड़ा बदलाव: रोडवेज के साथ मिलकर बसें चलाएगी GMOU, अनुबंध की तैयारी शुरू

उत्तराखंड के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में सफर करने वाले हजारों यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स यूनियन की बसों का संचालन अब उत्तराखंड रोडवेज के जरिए करने की तैयारी चल रही है। इस ऐतिहासिक कदम के लिए जीएमओयू ने खुद आगे बढ़कर रोडवेज प्रबंधन से संपर्क साधा है।

रोडवेज के महाप्रबंधक क्रांति सिंह ने बताया कि जीएमओयू के प्रतिनिधियों की मांग पर कंपनी से एक औपचारिक लिखित प्रस्ताव मांगा गया है। इस लिखित प्लान को बहुत जल्द ही उच्चाधिकारियों के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला और अनुबंध की शर्तें

इस नए प्रस्ताव के तहत जीएमओयू की बसों को अनुबंध के आधार पर रोडवेज के बड़े बेड़े में शामिल किया जाएगा। योजना लागू होने के बाद बस मालिकों को उनके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर प्रति किलोमीटर की दर से सीधे भुगतान मिलेगा।

किलोमीटर के हिसाब से निश्चित भुगतान की व्यवस्था होने से निजी बस मालिकों को सवारियों की कमी के कारण होने वाले हर दिन के आर्थिक नुकसान से बड़ी राहत मिलेगी, साथ ही उनकी आय भी सुनिश्चित हो सकेगी।

इस संभावित निर्णय का सबसे बड़ा लाभ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वाले वरिष्ठ नागरिकों, छात्राओं, राज्य आंदोलनकारियों और दिव्यांगजनों को मिलेगा। इन बसों में भी उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली निशुल्क और रियायती यात्रा योजनाओं का सीधा लाभ मिलने लगेगा।

500 से अधिक बसों का है बड़ा बेड़ा

वर्तमान में जीएमओयू के पास कुल मिलाकर 500 से अधिक बसों का एक बड़ा और मजबूत बेड़ा मौजूद है। इस बेड़े के माध्यम से यह यूनियन रोजाना विभिन्न पहाड़ी और दुर्गम मार्गों पर 150 से अधिक दैनिक बस सेवाएं संचालित करती है।

इसके मुख्य रूटों में ऋषिकेश, कोटद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और कुमाऊं मंडल का रामनगर शामिल हैं। इसके विपरीत, सरकारी क्षेत्र में रोडवेज की इन पहाड़ी मार्गों पर केवल 30 से 35 बस सेवाएं ही वर्तमान में संचालित हो पाती हैं।

इस पूरे विषय पर जीएमओयू के पर्यटन अधिकारी अनिल बर्गली ने बताया कि रोडवेज प्रबंधन के साथ उनकी शुरुआती बातचीत बेहद सकारात्मक रही है। इस विषय पर जल्द ही दोनों पक्षों के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।

अंग्रेजों के जमाने से ही गढ़वाल में जीएमओयू और कुमाऊं में केएमओयू उत्तराखंड की सबसे पुरानी परिवहन कंपनियों के रूप में सेवा दे रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस नए समन्वय से राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में बसों की किल्लत हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

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