
उत्तराखंड से हाल ही में एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका कर रख दिया है। दरअसल, कुछ समय पहले CAG ने समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं का ऑडिट किया, इस ऑडिट के दैरान ज्ञात हुआ कि प्रदेश में ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भरमार है जो मोटी सरकारी पेंशन पाने के बावजूद भी गरीबों के हक की पेंशन डकार रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में कई लोग एक साथ दो-दो पेंशन का लाभ कई सालों से उठा रहे हैं, CAG ने अपने ऑडिट में पाया कि विधवा और वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों का डाटा सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सूची से मिलाया गया है। वहीं इस धांधलेबाजी में 1363 से भी अधिक ऐसे लोगों का नाम शामिल हैं, जो सरकारी विभागों से रिटायर होने के बाद भी नियमित रुप से मोटी सरकारी पेंशन ले रहे हैं।
हैरत की बात यह है कि ये सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग की विधवा और वृद्धा पेंशन का लाभ भी उठा रहे हैं। यह सारा घोटाला उस वक्त पकड़ में आया जब दोनों ही योजनाओं के रिकॉर्ड में इन लोगों के आधार कार्ड दर्ज पाए गए। वहीं समाज कल्याण विभाग के नियमों के मुताबिक, विधवा और वृद्धावस्था पेंशन उन्हीं लोगों को दी जाती है, जिनकी मासिक आय चार हजार रुपये से कम हो।
फर्जी पेंशन और आय प्रमाण पत्र जारी
CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि समाज कल्याण विभाग की पेंशन योजनाओं में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी, जिन्हें औसतन 35 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती है, उन्होंने गलत आय प्रमाण पत्र बनवाकर गरीबी रेखा के नीचे पेंशन हासिल की। ये योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए हैं, इसलिए CAG ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव को पत्र भेजकर पूरी जांच के आदेश दिए हैं और 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इस घोटाले से शासन में हड़कंप मच गया है, अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सरकारी खजाने का नुकसान वसूलने पर सबकी नजरें टिकी हैं।




