
उत्तराखंड में आगामी होली पर्व को देखते हुए चंपावत के लोहाघाट में महिलाओं की संस्था वैली क्रिएशन के द्वारा फ़लो, सब्जियों व फूलों से होली के प्राकृतिक रंग तैयार किए जा रहे हैं। अध्यक्ष नेहा मुरारी के नेतृत्व में यह कार्य इन दिनों महिलाओं के लिए रोजगार का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है। वहीं संस्था अध्यक्ष नेहा मुरारी ने कहा उनकी संस्था वैली क्रिएशन से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक रूप से कमजोर 100 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा उनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर अपने पैरों पर खड़ा करना है। नेहा मुरारी ने बताया वर्तमान में आगामी होली पर्व को देखते हुए संस्था की महिलाओं के द्वारा हल्दी, नीम के पत्ते ,चुकंदर , बुरास के फूल, पालक व मेरी गोल्ड के फूलों से होली के प्राकृतिक रंग बनाए जा रहे हैं। जिसके लिए महिलाओं को विशेष तौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नेहा ने बताया इन रंगों की बिक्री ऑनलाइन माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों व नगरों में की जाएगी तथा नगर में स्टाल लगाकर भी यह प्राकृतिक है जिनसे त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।
महिलाओं ने बनाए प्राकृतिक होली रंग
उत्तराखंड में वैली क्रिएशन संस्था की महिलाएं होली के लिए प्राकृतिक रंग बना रही हैं, जो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। संस्था अध्यक्ष नेहा मुरारी ने बताया कि पिछले साल भी बड़ी मात्रा में प्राकृतिक रंग तैयार किए गए थे, जिन्हें ग्राहकों ने सराहा। इस बार भी क्षेत्रीय महिलाएं प्राकृतिक स्रोतों से रंग बना रही हैं, जिससे उन्हें घर बैठे अच्छा रोजगार मिल रहा है। महिलाओं ने कहा कि नेहा मुरारी के सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला है, इसके लिए वे उनका धन्यवाद करती हैं। संस्था हाथ से बुनी बनियान, एपन कला के उत्पाद, राखियां भी तैयार करती है। सरकार की सशक्त बहन योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम हो रहा है और एपन कला को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि फिलहाल संस्था को सरकारी सहायता नहीं मिली है, लेकिन भविष्य में सहयोग की उम्मीद है। यह पहल पर्यावरण के अनुकूल रंगों के साथ महिलाओं को सशक्त बना रही है। स्थानीय स्तर पर इससे रोजगार बढ़ेगा और होली पारंपरिक तरीके से मनाई जा सकेगी। महिलाओं की मेहनत सराहनीय है, जो समाज को सकारात्मक दिशा दे रही है।




