
नरेंद्रनगर। उत्तराखंड के नरेंद्रनगर वन प्रभाग के तहत मुनि की रेती क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि पर शराब की दुकान संचालित किए जाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को संबंधित वन भूमि का सीमांकन कराने और अवैध कब्जे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विवादित भूमि का नक्शा और उससे जुड़े सभी आधिकारिक अभिलेख कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि शराब की दुकान का लाइसेंस ढालवाला क्षेत्र के नाम पर जारी किया गया था, लेकिन दुकान का संचालन मुनि की रेती की आरक्षित वन भूमि पर किया जा रहा था।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी उजागर हुआ कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 23 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था। पत्र में मामले पर नियमानुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन शासन स्तर से अब तक न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही जवाब भेजा गया, जिस पर एनजीटी ने कड़ी नाराजगी जताई।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने केंद्रीय मंत्रालय के पत्र पर ढिलाई बरतने को बेहद गंभीरता से लिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित चार सप्ताह की अवधि में जवाब और सीमांकन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो टिहरी के जिलाधिकारी और नरेंद्रनगर के प्रभाग अधिकारी को मूल अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से एनजीटी में पेश होना पड़ेगा।
एनजीटी के कड़े आदेश के बाद अब वन विभाग और जिला प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। मुनि की रेती में आरक्षित वन भूमि के सीमांकन की कार्रवाई शुरू की जा रही है, ताकि समय रहते वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट और नक्शा ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश किया जा सके।




