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उत्तराखंड के जंगलों में भड़की आग; 24 घंटे में मिले 500 से ज्यादा फायर अलर्ट

उत्तराखंड में गर्मी बढ़ने और पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के साथ ही राज्य के जंगलों में वनाग्नि की घटनाएं तेजी से बढ़ गई हैं। इस भीषण आपदा के कारण अब तक राज्य का 240 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है। संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा केवल एक ही दिन में 500 से ज्यादा फायर अलर्ट जारी किए गए, जिनमें टिहरी और बागेश्वर जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं।

इस वनाग्नि की चपेट में आने से चमोली जिले में आग बुझाने के दौरान गहरी खाई में गिरने से एक फायर वाचर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कीर्तिनगर इलाके में घास लेने गई एक महिला की भी जलकर मौत होने की खबर है, जिसकी जांच की जा रही है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य भर में हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों के मोबाइलों पर संदेश भेजे हैं और वन विभाग को चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

चमोली जिले के बेडूबगड़-बिरही क्षेत्र में बदरीनाथ हाईवे के पास चीड़ के जंगल में लगी आग को बुझाने के प्रयास में जुटे 42 वर्षीय फायर वाचर राजेंद्र सिंह नेगी की दर्दनाक मौत हो गई। वह आग बुझाते समय अनियंत्रित होकर एक गहरी खाई में गिर गए और बुरी तरह झुलस गए। रात भर चले व्यापक सर्च अभियान के बाद एसडीआरएफ (SDRF) की टीम ने गुरुवार सुबह उनका शव बरामद किया। इस हादसे के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने आपात बैठक बुलाई है और सभी डीएफओ को खुद फील्ड में उतरकर उपकरणों के साथ अलर्ट रहने को कहा है।

दूसरी दुखद घटना कीर्तिनगर के पैडुला क्षेत्र की है, जहां पिपोला निवासी 50 वर्षीय अंजू देवी बुधवार दोपहर जंगल में घास लेने गई थीं। इसी दौरान जंगल में अचानक आग भड़क उठी और वह उसकी चपेट में आ गईं। देर शाम ग्रामीणों को जंगल में उनका अधजला शव मिला, जिसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर सूचना मिलने के बाद भी मौके पर न पहुंचने का आरोप लगाया। हालांकि, वन अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई वह राजस्व विभाग की भूमि है, और फिलहाल मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए मामले की जांच की जा रही है।

बढ़ते तापमान और वनाग्नि के विकराल रूप को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। लोगों को उनके मोबाइल फोन पर संदेश भेजकर सचेत रहने और जंगलों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की गई है। इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर मुस्तैदी बढ़ा दी गई है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं वनाग्नि प्रबंधन के उपायों और इस संकट की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि आग पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।

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