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उत्तराखंड राजनीति में भूचाल: दो पत्नियों और हलफनामे पर घिरे हरक सिंह रावत, भावना पांडे ने की जांच की मांग!

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में उनकी पत्नी दीप्ति रावत के एक सोशल मीडिया वीडियो से शुरू हुआ पारिवारिक व राजनीतिक घमासान अब और उग्र हो गया है। राज्य की जानी-मानी समाजसेवी भावना पांडे ने इस मुद्दे को लेकर हरक सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पूर्व मंत्री के वैवाहिक जीवन और चुनावी हलफनामों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

भावना पांडे का सीधा आरोप है कि हरक सिंह रावत चुनावी नामांकन के दौरान दस्तावेजों में अपनी केवल एक पत्नी का ब्योरा दर्ज करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत में उनकी दो पत्नियां हैं। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि चुनावी दस्तावेजों में दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति के बीच इतना बड़ा विरोधाभास क्यों है? उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग में जमा किए गए हलफनामे में कोई भी जानकारी छिपाई गई है, तो यह कानूनी अपराध है और इसकी निष्पक्ष तरीके से गहन जांच होनी चाहिए।

अपने बयानों में भावना पांडे ने राज्य में लागू समान नागरिक संहिता और हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधानों का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में कानून सभी नागरिकों के लिए बराबर है, चाहे कोई आम इंसान हो या बड़ा राजनीतिक रसूख रखने वाला नेता। भावना पांडे ने धामी सरकार से आग्रह किया कि इस मामले को महज एक पारिवारिक या निजी विवाद मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

भावना पांडे ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रखेंगी। उन्होंने ऐलान किया है कि वह जल्द ही इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत भारत निर्वाचन आयोग से करेंगी। उनका कहना है कि आयोग के समक्ष हलफनामे और नामांकन पत्रों से जुड़े सभी तथ्य रखे जाएंगे, ताकि कानूनी सच्चाई जनता के सामने आ सके।

गौरतलब है कि दीप्ति रावत के वीडियो के बाद इस पूरे प्रकरण ने नया सियासी रंग ले लिया है। हालांकि, भावना पांडे द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस मामले में हरक सिंह रावत या उनके समर्थकों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है।

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