
प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक इन दिनों नशे के कारोबार और रसूखदार परिवारों की नजदीकियों की चर्चा जोरों पर है। इस विवाद के केंद्र में पड़ोसी राज्य का संदिग्ध नेटवर्क ऑपरेटर शाहरुख उर्फ शिवम गुप्ता उर्फ साहिल है। चर्चाएं गर्म हैं कि नशे की तस्करी में अपनी पैठ बना रहा यह शख्स न केवल दूसरे राज्यों में सक्रिय है, बल्कि उत्तराखंड के रसूखदार घरानों में भी अपनी पहुंच बना चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, एक प्रभावशाली नेता के परिवार से शाहरुख के संबंधों की खबरें सामने आने के बाद सियासी पारे में उबाल आ गया है। सबसे बड़ा मामला हाल ही में हुए एक कथित वित्तीय लेनदेन का है। बताया जा रहा है कि एक नेता के पुत्र के माध्यम से शाहरुख के खातों या हाथों में लाखों रुपये पहुंचाए गए। जैसे ही इस लेनदेन की खबर नेता तक पहुंची, राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई।
इस लेनदेन को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह केवल एक सामान्य व्यापारिक लेनदेन था या फिर नशे के काले कारोबार को वित्तीय मदद देने की कोशिश? इन सभी सवालों के जवाब बैंक खातों की सघन जांच और वित्तीय फॉरेंसिक से ही सामने आ सकेंगे। बिना निष्पक्ष जांच के इस लेनदेन की असली वजह सामने आना मुमकिन नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम में शाहरुख के पुराने आपराधिक इतिहास ने भी मामले को गंभीर बना दिया है। वर्ष 2020-21 में अपने कारनामों की वजह से जेल की सजा काट चुके शाहरुख का दोबारा सक्रिय होना कई सवाल खड़े करता है। क्या उसे कानून का खौफ नहीं है, या फिर राजनीतिक रसूख की आड़ में उसका नेटवर्क बेखौफ फल-फूल रहा है?
विवाद की कड़ियां यहीं खत्म नहीं होतीं। नेता के करीब रहने वाले एक ऐसे व्यक्ति का नाम भी सामने आया है जो पूर्व में महिला से छेड़छाड़ के आरोप में जेल जा चुका है। यह व्यक्ति शाहरुख से जुड़े एक मोबाइल कारोबारी के लगातार संपर्क में बताया जा रहा है। अब जनता यह जानने को उत्सुक है कि नशे का कारोबार करने वालों और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को किस रसूखदार का संरक्षण हासिल है और क्या जांच एजेंसियां इन चेहरों से पर्दा उठाएंगी?





