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लोहाघाट लॉ कॉलेज की मांग तेज: 17 फरवरी से 3 दिवसीय धरना, 2012 घोषणा पर विपिन गोरखा का ऐलान

लोहाघाट विकास संघर्ष समिति ने लोहाघाट महाविद्यालय में लॉ कॉलेज निर्माण की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। समिति 17 फरवरी मंगलवार से गांधी चौक लोहाघाट पर तीन दिवसीय सांकेतिक धरना देगी। यह फैसला बुधवार को समिति अध्यक्ष विपिन गोरखा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। विपिन गोरखा ने बताया कि वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने रामलीला मंच लोहाघाट से लॉ कॉलेज बनाने की घोषणा की थी, लेकिन 14 साल बाद भी यह सिर्फ कागजों पर ही सिमट गई है। लोहाघाट और आसपास के क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को लॉ की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा, रुद्रपुर, देहरादून जैसे दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और समय की बर्बादी हो रही है।


विकास संघर्ष समिति लोहाघाट की विभिन्न समस्याओं को हमेशा प्रमुखता से उठाती रही है और इस बार भी सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रही है। समिति का कहना है कि स्थानीय लॉ कॉलेज से न केवल युवाओं को उच्च शिक्षा आसानी से मिलेगी, बल्कि क्षेत्र का समग्र विकास भी होगा। धरना शांतिपूर्ण होगा, लेकिन मांग पूरी न होने पर आंदोलन को और तेज करने का मन है। स्थानीय निवासी और छात्रों ने इस पहल का स्वागत किया है। सरकार को अब इस पुरानी घोषणा को अमल में लाने का मौका है, वरना लोहाघाट के युवा आगे की राह देखेंगे। यह मुद्दा उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की कमी को उजागर करता है, जहां ऐसी सुविधाओं की सख्त जरूरत है।

SDM को सौंपा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी

लोहाघाट विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष विपिन गोरखा ने लोहाघाट महाविद्यालय में लॉ कॉलेज निर्माण की मांग तेज कर दी है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को एसडीएम लोहाघाट को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 17 फरवरी से गांधी चौक पर तीन दिवसीय सांकेतिक धरना होगा। गोरखा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार जल्द लॉ कॉलेज नहीं बनाती, तो समिति उग्र आंदोलन को मजबूर होगी और जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री की पुरानी घोषणा ठंडे बस्ते में डाल दी गई, जिसका खामियाजा लोहाघाट के छात्र भुगत रहे हैं। न भाजपा, न कांग्रेस के प्रतिनिधि आवाज उठा रहे। समिति सदस्यों ने याद दिलाया कि सरयू लिफ्ट पेयजल योजना के लिए उनके आंदोलन के बाद काम शुरू हुआ। अब लॉ कॉलेज के लिए भी यही रास्ता अपनाएंगे, ताकि स्थानीय छात्रों को दूर न जाना पड़े।

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