उत्तराखंडदेहरादूनशासनसामाजिक

सड़कों पर उतरे असम राइफल्स जवान: DG पर शोषण के गंभीर आरोप, मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन

लोहाघाट में आज असम राइफल्स के पूर्व सैनिकों और अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार आक्रोश रैली निकाली। असम राइफल्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गंगा दत्त चौबे के नेतृत्व में वीर कालू सिंह चौराहे से एसडीएम कार्यालय तक सैकड़ों पूर्व जवान सड़कों पर उतर आए। नारेबाजी करते हुए उन्होंने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें असम राइफल्स के डीजी पर शोषण और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए गए। संगठन अध्यक्ष गंगादत्त चौबे और उपाध्यक्ष जगदीश चतुर्वेदी ने कहा कि वे वर्षों से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन डीजी की उदासीनता से उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि असम राइफल्स ने भारतीय सेना के कंधे से कंधा मिलाकर कई युद्ध लड़े हैं। श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ उनकी बहादुरी ने इतिहास रचा, जहां कई जवानों ने शहादत दी। फिर भी, उन्हें भारतीय सेना का पूर्ण हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि पुलिस जैसा दर्जा दिया जाता है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि असम राइफल्स में सभी अधिकारी भारतीय सेना से हैं, इसलिए इसे सेना का अभिन्न अंग घोषित किया जाए। रैली में शामिल जवानों ने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होगा। यह प्रदर्शन उत्तराखंड के लोहाघाट में कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।


पूर्व सैनिकों की यह लड़ाई न केवल उनकी व्यक्तिगत मांगों तक सीमित है, बल्कि पूरे असम राइफल्स बल की गरिमा और सम्मान से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों ने भी उनके संघर्ष का समर्थन किया और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द हस्तक्षेप कर न्याय देगी। असम राइफल्स के जवानों की यह आवाज पूरे देश के पूर्व सैनिकों की पीड़ा को प्रतिबिंबित करती है, जहां सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका संघर्ष समाप्त नहीं होता। अब सभी की नजरें हैं कि मुख्यमंत्री इस ज्ञापन पर क्या कार्रवाई करते हैं।

असम राइफल्स पूर्व सैनिकों का आक्रोश


लोहाघाट में असम राइफल्स एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन (एआरईएसएम) के जिला अध्यक्ष गंगा दत्त चौबे और उपाध्यक्ष जगदीश चतुर्वेदी के नेतृत्व में पूर्व सैनिकों ने जोरदार आक्रोश रैली निकाली। वीर कालू सिंह चौराहे से एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि असम राइफल्स से भारतीय सेना का काम लिया जा रहा है, लेकिन तनख्वाह पुलिस वाली दी जा रही है। प्रमुख मांगें हैं- समान काम के लिए समान वेतन, असम राइफल्स को पुलिस न मानकर सेना का दर्जा देना, क्योंकि यह मिलिट्री भूमिका निभाती है। एआरईएसएम के जरिए अरेवा को दबाने की कोशिश बंद हो, जो लीगल संगठन है। असम राइफल्स का दोहरा नियंत्रण खत्म किया जाए और भेदभाव बंद हो।


जिला अध्यक्ष गंगा दत्त चौबे ने कहा, असम राइफल्स का गौरवशाली इतिहास है, कई युद्धों में शहादत दी। डीजी पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए गृहमंत्री अमित शाह से मांगें पूरी करने की अपील की। पूरे देश में आज पूर्व सैनिक आक्रोश रैली कर रहे हैं। दो महत्वपूर्ण पद भी खत्म कर दिए गए। अगर पुलिस माना जा रहा है तो सेना का काम न लें, पुलिस का ही करवाएं। जिले के कई पूर्व जवान रैली में शामिल हुए। संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मांगे पूरी न हों। यह प्रदर्शन पूर्व सैनिकों की लंबी लड़ाई का हिस्सा है, जो उनकी गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए है। स्थानीय लोगों ने समर्थन दिया। अब सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button