
उत्तराखंड में पलायन वह रोग बनकर उभरा है, जिसनें चंद समय में ही गांव के गांव निगल डाले। वहीं राज्य सरकार के लिए भी पलायन सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है, हालांकि, उत्तराखंड सरकार पलायन पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर गंभीर कदम भी उठा रही है। इस क्रम में राज्य के 12 जिलों में ऐसे 474 गांवों को चिह्नित किया गया है जो 50% से अधिक पलायन वाले हैं, इन चिह्नित गांवों में मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत कुल 155 योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।
बताते चलें कि इनमें 90 गांव और 5 सीमावर्ती जिलों के चयनित विकासखंडों को मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत कायाकल्प किया जाएगा। इस प्रकार इन जिलों में 245 योजनाएं प्रस्तावित हैं और इन दोनों योजनाओं द्वारा पलायन रोकथाम की जानकारी मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में दी गई।
योजनाओं में कोई रिक्तता मान्य नहीं- मुख्य सचिव
उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने पलायन रोकथाम और सीमांत क्षेत्र विकास योजनाओं के तेज क्रियान्वयन पर जोर देते हुए जिलों से आने वाले प्रस्तावों को निर्धारित समय में अनुमोदित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेरोजगार युवाओं, प्रवासी परिवारों को स्वरोजगार मिले और पलायन रुके। उन्होंने लक्ष्य आधारित प्रभावी उपाय अपनाने व संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन कर योजनाओं को लागू करने की हिदायत दी, जिससे इन गांवों में स्थायी आजीविका बने और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा का काम करें। पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने भी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव की सराहना की, लेकिन बेहतर क्रियान्वयन पर बल दिया, जो मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना व सीमांत विकास कार्यक्रम के जरिए घर वापसी को प्रोत्साहित कर रही हैं।




