
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 28 जुलाई से 2 अगस्त तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में तेज गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट पर है।
प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए मंगलवार को चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी व निजी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। इन जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों ने पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इसके साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और उफान पर आ रहे नदी-नालों के पास न जाने की हिदायत दी गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के 11 जिलों में अगले 24 घंटों के भीतर मध्यम फ्लैश फ्लड आने का खतरा जताया है। अल्मोड़ा, चम्पावत, पौड़ी और देहरादून सहित संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्रों में छोटे नदी-नाले अचानक उफान पर आ सकते हैं।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि ऑरेंज अलर्ट के दौरान भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कें बंद होने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने आम नागरिकों और चारधाम यात्रियों से अपील की है कि वे सड़क और मौसम की सही जानकारी लेने के बाद ही सफर शुरू करें।
दूसरी ओर, मैदानी इलाकों में बीते कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली है। सोमवार शाम को हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई। देहरादून में सोमवार को अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
देहरादून शहर में 0.2 एमएम, जौलीग्रांट में 11.0 एमएम और मालदेवता में 10.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि 2 अगस्त तक पूरे प्रदेश में रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम विभाग के अलर्ट का गंभीरता से पालन करें और सुरक्षित स्थानों पर ही ठहरें। संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर मलबे की समस्या से निपटने के लिए जेसीबी और राहत टीमों को तैनात कर दिया गया है। राज्य आपदा कंट्रोल रूम को 24 घंटे एक्टिव मोड में रखा गया है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जलभराव या मार्ग बाधित होने की सूचना मिलते ही तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाए।




