
राज्य में हाल ही में हुए तबादलों के बाद जहां अधिकांश अधिकारी औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करते ही बधाई संदेशों और शुभचिंतकों से घिरे नजर आए, वहीं एक विभाग ऐसा भी रहा जिसने पहले ही दिन से चर्चाओं को जन्म दे दिया। बताया जा रहा है कि एक वरिष्ठ अधिकारी के पदभार संभालते ही 40 से अधिक लोग उन्हें बधाई देने और अनौपचारिक मुलाकात के उद्देश्य से कार्यालय पहुंचे, लेकिन किसी भी व्यक्ति को साहब के कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ विभाग के भीतर बल्कि शासन-प्रशासन के गलियारों में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह विभाग सीधे तौर पर जनता से जुड़ा हुआ है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में पदभार ग्रहण करते ही इस तरह का सख्त रवैया अपनाया जाना भविष्य की कार्यप्रणाली को लेकर आशंकाएं पैदा कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब बधाई देने आए लोगों तक को अधिकारी से मिलने का अवसर नहीं मिल पा रहा, तो आम जनता की फरियादों को किस तरह सुना जाएगा। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि जनता से जुड़े विभागों में संवाद और सहजता बेहद जरूरी होती है, लेकिन यहां शुरुआती संकेत इसके उलट नजर आ रहे हैं।
शासन में हुए इस फेरबदल के बाद यह भी कहा जा रहा है कि अब व्यवस्थाएं पहले जैसी नहीं रहेंगी। अधिकारी का सख्त लहजा और बंद कमरे में काम करने की शैली विभागीय सिस्टम पर असर डाल सकती है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से पब्लिक डिलिंग कमजोर होती है, जिसका सीधा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। फाइलों का निपटारा, शिकायतों की सुनवाई और कर्मचारियों के साथ समन्वय—इन सभी पहलुओं पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस अधिकारी को लेकर पहले से ही मतभेद की बातें सामने आती रही हैं। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले भी कुछ विभागीय मंत्रियों द्वारा इस अधिकारी को हटाने की मांग की जा चुकी है। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि मौजूदा विभाग में उनका कार्यकाल कितना लंबा रहेगा। चर्चाएं यह भी हैं कि एक मंत्री के साथ उनकी ‘स्क्रैबल’ यानी खींचतान कितने दिनों तक चल पाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।
कुल मिलाकर, जनता से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग में सख्त प्रशासनिक रवैये के चलते सिस्टम के बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि शुरुआती दौर में ही संवाद की कमी और कठोरता हावी रही, तो चुनावी साल में सरकार के सामने इस विभाग की छवि सुधारने और जनता का भरोसा वापस जीतने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि सिस्टम इस स्थिति को किस तरह संभालता है और क्या संबंधित अधिकारी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाकर जनता और विभागीय कर्मचारियों के साथ बेहतर तालमेल बना पाते हैं या फिर विभाग से हालही में बदले गए अधिकारी को ही पुनः मौका मिलेगा।।




