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ऋषिकेश में आवारा पशुओं का आतंक: एक निराश्रित गोवंश का महिला पर हमला,बाल-बाल बची

योगनगरी ऋषिकेश में आवारा पशुओं का आंतक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सड़कों पर यहां-वहां घूम रहे आवारा पशुओं ने राहगीरों समेत स्थानीय लोगों की नाक में दम कर दिया है। शहर में कदम रखने पर महसूस होता है कि मानों आपने नगर में नहीं बल्कि किसी गौशाला में कदम रख दिया हो। सड़कें आवारा पशुओं के मल-मूत्र से पटी पड़ी हैं, जहां-तहां पड़े पशु न केवल पैदल चलने वाले राहगीरों को बाधित करते हैं बल्कि रात के समय यह सड़क दुर्घटना का भी सबब बनते हैं।

ऋषिकेश में पर्यटक राम झूला, लक्ष्मण झूला, स्वर्ग आश्रम और त्रिवेणी घाट जैसे स्थानों का रुख करते हैं, लेकिन इन पर्यटन स्थलों पर उनका सामना सैकड़ों की संख्या यहां-वहां विचरण करते आवारा पशुओं से होता है। इन आवारा पशुओं से न केवल पर्यटक बल्कि स्थानिय लोग भी परेशान हैं। चिंता का विषय यह है कि आगामी दिनों में चारधाम यात्रा शुरु होने वाली है, स्पष्ट है कि अधिक संख्या में पर्यटक योगनगरी का भी रुख करेगें, ऐसे में आवारा पशुओं का आतंक किसी बड़ी दुर्घटना को दावत न दे इसके लिए सरकार और प्रशासन को ठोस कदम उठाना लाजमी हो जाता है।

दरअसल, इस बात का जिक्र इसलिए भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि बीते गुरुवार को गुमानीवाला में एक महिला पर एक आवारा पशु ने पीछे से हमला कर दिया और किसी तरह आसपास के लोगों ने महिला को आवारा पशु से बचाया। वहीं ग्राम प्रधान बॉबी रांगड़ ने बताया कि पहले आवारा पशुओं को पकड़कर दूसरे स्थान में छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था भी ठप्प है। स्थानीय लोगों कहना है कि वह सरकार से लेकर शासन और प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत करा चुके हैं लेकिन अब तक ना ही सरकार द्वारा और ना ही शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे पहले भी नगर निगम ऋषिकेश, नगर पालिका मुनिकीरेती क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।

अंतत:, हैरानी की बात तो यह है कि गुमानीवाला के करीब ही पशुलोक जैसा बड़ा संस्थान है, जहां भूमि की कोई किल्लत नहीं है, अगर सरकार चाहे तो शहर को आवारा पशुओं के आतंक से मुक्त करने के लिए सेल्टर का निर्माण कर सकती है।

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