उत्तराखंडदेहरादूनवैश्विकशासनसामाजिक

आबकारी विभाग में उर्दू अनुवादक नियुक्तियों पर उठे सवाल, RTI के बाद धामी सरकार से जांच की मांग

देहरादून। उत्तराखंड में आबकारी विभाग समेत कुछ सरकारी विभागों में उर्दू अनुवादकों की नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता विकेश नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के आधार पर आरोप लगाया है कि कुछ विभागों में ऐसे पदों पर नियुक्तियां की गईं, जिनका नियमित रूप से सृजन ही नहीं किया गया था। इस मामले को लेकर उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

विकेश नेगी ने पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन से उर्दू अनुवादकों के पदों और नियुक्तियों से जुड़ी जानकारी मांगी थी। आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर उनका दावा है कि राज्य में उर्दू अनुवादकों के लिए स्पष्ट रूप से नियमित पद स्वीकृत नहीं थे, इसके बावजूद कुछ विभागों में कर्मचारियों की तैनाती हुई और उन्हें वेतन भी दिया गया। सबसे ज्यादा सवाल आबकारी विभाग को लेकर उठ रहे हैं, जहां कथित तौर पर बिना पद सृजन के नियुक्तियों का आरोप लगाया गया है।

नेगी का कहना है कि यदि आरटीआई में सामने आई जानकारी सही है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की है कि सरकार यह जांच करे कि इन नियुक्तियों को किस आधार पर मंजूरी दी गई, किन अधिकारियों की भूमिका रही और लंबे समय तक ऐसी व्यवस्था कैसे चलती रही।

इस मामले ने अब राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना स्वीकृत पदों पर नियुक्तियां हुई हैं तो यह केवल एक विभाग तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी भर्ती और कार्मिक व्यवस्था की समीक्षा का विषय बन सकता है।

आबकारी विभाग का नाम सामने आने से विवाद और बढ़ गया है। अब सभी की नजरें धामी सरकार के अगले कदम पर हैं। देखना होगा कि सरकार इस मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करती है या फिर यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button