
उत्तराखंड में बीते 3-4 सालों में भले ही सड़कों का जाल बिछा हो लेकिन राज्य के कई जिलों की धरातलिय स्थित कुछ और ही बयां करती है। ऐसी ही कुछ खबरें मुनस्यारी तहसील के सीमान्त क्षेत्रों से इन दिनों चर्चा में है, आजादी के 77 साल बाद भी सीमान्त क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बरकरार है। यहां के ग्रामीण आज भी अपनी जरूरत की सामग्री अपनी ही पीठ में ढोकर ले जाने को मजबूर हैं। दरअसल, साल 2022 में जीमिया गांव से क्वीरी गांव तक 2 किमी मोटर मार्ग जो कि धापा–मिलम मोटर मार्ग से लगभग 5 किमी लम्बे मार्ग का हिस्सा है, उसे निर्माण के लिए अलग काट दिया गया था, लेकिन उसका निर्माण कार्य जस का तस पड़ा हुआ है और बीते 2 सालों के बाद भी उसे लोक निर्माण विभाग डीडीहाट द्वारा खोला नहीं जा सका है।
पीठ में बोझा ढोने को जनता विवश
ग्रामीणों के अनुसार इस बरसात में भूस्खलन से जगह–जगह मार्ग टूट गया, जिसके बाद विभाग ने भी आधा-अधूरा मलबा हटाया तो सही लेकिन पूरी तरह मार्ग सुचारू नहीं किया जा सका। जिसके बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार शासन–प्रशासन से गुहार लगाई, मगर किसी ने सीमान्त क्षेत्र के इन गांवों की गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। वहीं जब लोक निर्माण विभाग से इसका उत्तर मांगा गया तो विभाग की ओर से कहा गया कि यह कार्य अभी प्रथम फेज में है, जबकि पैदल रास्ते भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। । आज भी साईं पोलू ग्राम पंचायत और क्वीरी ग्राम पंचायत के लोग मोटर मार्ग स्वीकृत होने के बावजूद अपनी पीठ में ही जरूरी सामग्री ढोकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं।




