
पूछड़ी में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर बीते रविवार को प्रशासन व वन विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई करी, इस कार्रवाई को अंतर्गत क्षेत्र में कुल 52 निर्माण ध्वस्त किए गए। वहीं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को तीन दिन बीत जाने के बाद आज भी पीड़ित परिवार कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे अपने मासूम बच्चों के साथ जिंदगी जीने को मजबूर है। पूछड़ी वन क्षेत्र में आशियाना टूटने के बाद वहां के निवासियों का सबकुछ बिखर गया, आलम यह है कि परिवार अब रोटी-रोटी को मोहताज है। मगर मजाल है जो सत्ता और विपक्ष के लोग राशन देना तो छोड़िए इन परिवारों की दयनीय स्थिति देखने भी आए हों। वहीं उजड़े आशियाने के मलबे पर बैठे इन परिवारों का रोष शीर्ष पर है और उनका गुस्सा इन प्रतिनिधियों के खिलाफ भड़कने लगा है।
बेघरों के आंसू देख भावुक हुईं ब्लॉक प्रमुख
बीते बुधवार को ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी एवं ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष नवीन सती के अलावा कई पंचायत प्रतिनिधि इन पीड़ित परिवारों का दुख- दर्द जानने के लिए मौके पर पहुंचे। यहां पीड़ितो परिवारों द्वारा अपनी आपबीती बताते समय उनकी आंखों में आंशू भरे थे, उन्होंने प्रशासन पर अतिक्रमण हटाने के दौरान अभद्रता एवं उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी एवं ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी की आंखे भी दर्द देखकर भावुक हो गयीं, लिहाजा उन्होंने कहा कि अब पीड़ित परिवारों की लड़ाई पंचायत प्रतिनिधि लड़ेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही इन मामलों को लेकर उच्च न्यायालय जाने के साथ ही सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि सत्ता दल और विपक्ष के लोग गरीब और असहाय लोगों को केवल चुनाव के दौरान वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं, वहीं अब ऐसे व्यवहार का खामियाजा ऐसी पार्टियों को 2027 के विधानसभा चुनाव में भुगतना होगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद बने अनिल बलूनी ने ऐसे सभी लोगों को मलिकाना हक एवं वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की कसम खाई थी। लेकिन आज चुनाव जीतने के बाद वह जहां एक ओर अपनी कसम भूल गए, तो वही रामनगर विधानसभा की जनता से भी उन्होंने अपनी दूरी बना ली है। साथ उन्होंने स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट द्वारा भी इस मामले में चुप्पी साधने पर उन पर भी कई सवाल खड़े किए हैं।



