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उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में अब प्राइवेट डॉक्टर करेंगे इलाज, सुबोध उनियाल की बड़ी पहल!

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ (Specialist) और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी। इससे मरीजों को इलाज या ऑपरेशन के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही, दून मेडिकल कॉलेज में लोगों को निजी लैब के मुकाबले तीन गुना सस्ती दरों पर स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट डॉक्टरों की सेवाएं

जिला अस्पतालों में हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसे विभागों में विशेषज्ञों की कमी के कारण अक्सर मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। अब सरकार ने निर्णय लिया है कि इन अस्पतालों में निजी डॉक्टरों को बुलाया जाएगा और उन्हें उनके ‘विजिट’ या ‘सर्जरी’ के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इससे आयुष्मान योजना के लाभार्थियों और पहाड़ी जिलों के मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

डॉक्टरों को पहाड़ों पर भेजने की योजना

पहाड़ी क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी को पूरा करने के लिए मैदानी क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों से डॉक्टरों को छह महीने के लिए पहाड़ भेजा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि पहले चरण में डॉक्टरों से स्वेच्छा से विकल्प मांगे जाएं। इसके अलावा ‘यू कोट, वी पे’ (You Quote, We Pay) योजना भी जारी है, ताकि डॉक्टरों को उनकी पसंद के वेतन पर दुर्गम क्षेत्रों में तैनात किया जा सके।

सस्ती दरों पर हेल्थ चेकअप पैकेज

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 17 तरह के किफायती हेल्थ पैकेज शुरू किए गए हैं। ये जांचें निजी पैथोलॉजी लैब की तुलना में दो से तीन गुना तक सस्ती हैं। खास बात यह है कि इन जांचों के लिए डॉक्टर के पर्चे की अनिवार्यता नहीं है, जिससे लोग समय पर अपनी सेहत का हाल जान सकेंगे। उदाहरण के तौर पर:

  • मिनी हेल्थ चेकअप: 610 रुपये
  • हेल्दी हार्ट प्रोफाइल: 828 रुपये
  • फुल बॉडी चेकअप: 2009 रुपये
  • विटामिन (डी और बी12): 800 रुपये

अन्य महत्वपूर्ण सहयोग

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए दून अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टर अब कोरोनेशन अस्पताल में भी अपना सहयोग देंगे। इससे कैथ लैब और ओपीडी सेवाओं में सुधार होगा और हृदय रोगियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

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