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जानिए क्यों हर 10 साल में नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व जाती है विशेषज्ञों की टीम

उत्तराखंड के प्रसिद्ध नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में जैव विविधता की निगरानी और अध्ययन के लिए आगामी 7 जून से एक विशेष अभियान शुरू होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए एक 30 सदस्यीय दल तैयार किया गया है, जिसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान, गढ़वाल विश्वविद्यालय और जीबी पंत संस्थान के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ-साथ वन विभाग, ITBP और SDRF के जवान भी शामिल होंगे।

इस बार के अध्ययन की सबसे खास बात यह है कि पर्यावरण और वन्यजीवों की निगरानी के लिए पहली बार ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। यह अभियान 28 जून तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य पिछले एक दशक में प्रकृति और वन्यजीवों में आए बदलावों का बारीकी से आकलन करना है।

नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में वर्ष 1981 से मानवीय गतिविधियां पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं, जिसके कारण इस संवेदनशील क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति को समझने के लिए वन विभाग द्वारा हर 10 साल में विशेषज्ञों की टीम भेजी जाती है। यह विशेष टीम वहां पहुंचकर एक दशक के अंतराल में जैव विविधता में होने वाले बदलावों का विस्तृत अध्ययन करती है।

हालांकि, यह अभियान तय व्यवस्था के अनुसार पिछले साल ही आयोजित होना था, लेकिन कुछ कारणों से टीम पिछले साल वहां नहीं जा सकी थी। इसी वजह से इस बार वन विभाग के अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए इसकी पूरी कार्ययोजना तैयार की है और इस संबंध में प्रमुख सचिव के समक्ष एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण भी दिया है।

डीएफओ और एनडीबीआर के उप निदेशक अभिमन्यु के अनुसार, इस पूरे अभियान के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाएगा कि वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन का इस क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है और ग्लेशियरों की वर्तमान स्थिति कैसी है। विशेषज्ञों का यह दल वनस्पति में आए बदलावों और वन्यजीवों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां जुटाएगा, जिसकी तुलना बाद में पुरानी रिपोर्टों से की जाएगी।

यह अभियान 7 जून को जोशीमठ से शुरू होकर 86 किलोमीटर की दूरी तय करेगा, जिसके तहत टीम लता खर्क, धरांसी पास, डिब्रूघेटा और सरसों पाताल जैसी दुर्गम जगहों से होते हुए आगे बढ़ेगी। सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों के लिए टीम के साथ डॉक्टर्स मौजूद रहेंगे, संचार की पुख्ता व्यवस्था होगी और इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि पूरे अभियान के दौरान कोई भी प्लास्टिक की चीज रिजर्व क्षेत्र के भीतर न छूटे।

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