उत्तराखंडदेहरादूनराजनीति

“फिर फिसली हरक दा की जबान, विवादित बयानों से कांग्रेस को कितना नुकसान”

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट खासा तेज हो चुकी है। उत्तराखंड में पक्ष-विपक्ष के कार्यकर्ताओं से लेकर दिग्गज राजनीतिज्ञ चेहरे 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी कमर कसते नजर आ रहे हैं। वहीं मौजूदा समय पर प्रदेश की राजनीति में एक हस्ती ऐसी भी है जो हर रोज खबरों की सुर्खी बनी रहती है और उनका नाम है- हरक सिंह रावत। अक्सर राजनीति के मंच पर नेताओं की फिसलती जबान पूरे दल पर भारी पड़ जाती है, इसी का जीता-जागता उदारहण है हरक सिंह रावत का ताज़ा विवादित बयान। दरअसल, हरक सिंह रावत ने अपने भाषण में सिख समुदाय को लेकर ‘12 बजे’ का संदर्भ दिया, जिसके बाद वहां मौजूद एक सिख व्यक्ति ने इस पर जब आपत्ति जताई तो हरक सिंह को तुरंत माफी मांगनी पड़ी। मगर हरक दा मुश्किलें इतनी आसानी से कहां कम होने वाली थी, विपक्ष के नेता द्वारा दिए विवादित बयान का वीडियो तेजी से वायरल हुआ और सिख समुदाय ने इसका विरोध तेज़ करते हुए घंटाघर में उनका पुतला दहन किया जमकर नारेबाजी की।


वहीं प्रदेश भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर तंज कसने में कोई कसर न छोड़ी। जिसके बाद हरक सिंह रावत ने स्वयं आगे आकर कहा कि- उनके बयान को भाजपा द्वारा राजतीनिक फायदा उठाने के लिए गलत ढंग से पेश किया जा रहा है। हरक सिंह ने कहा कि ‘12 बजे’ वाले संदर्भ से उनका तात्पर्य इतिहास के उस समय के मुगलकाल से था जब सिख योद्धा महिलाओं की रक्षा के लिए रात में छोटे समूहों में युद्ध करते थे। जबकि भाजपा इस बयान को जबरन सियासी रंग दे रही है। वहीं हरक सिंह रावत का यह भी कहना है कि मैने उक्त कथन के बाद तुरंत मंच से ही माफी मांग ली थी। मगर विवाद है कि थमने का नाम नही ले रहा।

विवादित बयानों से कांग्रेस को कितना नुकसान

हालांकि, अपने बयान पर मंच से ही माफी मांग लेने के बाद भी हरक सिंह रावत सीधे पोंटा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। जहां उन्होंने न सिर्फ गुरु ग्रंथ साहिब के आगे अरदास कर क्षमा मांगी बल्कि जोड़ा घर और लंगर में सेवा भी की। इसके बाद हरक सिंह ने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनसे कहा कि उनका इरादा किसी भी समाज की भावनाओं को आहत करने का नहीं था, वहीं बार काउंसिल के अधिवक्ताओं ने भी उनकी बात सुनते हुए मामले को शांत करना ही बेहतर समझा। जहां भाजपा इस पूरे मुद्दे को लेकर हरक सिंह पर तीखे वार कर रही है, वहीं उनके द्वारा गुरुद्वारा साहिब जाकर माफी मांगने और सेवा करने वाले इस कदम से उनकी सादगी और स्वीकार्यता झलक रही है जिससे जनता का एक बड़ा वर्ग उनकी सराहना कर रहा है।


हालांकि, 2027 विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड कांग्रेस को हरक सिंह रावत के यह तीखे बोल समर्थन देंगे या नुकसान, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। मगर इतना तो तय है कि एक बयान ने हरक सिंह रावत की सियासी जमीन को हिला दिया है और उत्तराखंड कांग्रेस 2027 की चुनावी रणनीति पर अब नए सिरे से विचार करने पर मजबूर अवश्य हो चुकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button