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उत्तराखंड में वनाग्नि को लेकर अलर्ट पर वन कर्मी, बिना आबादी वाले जंगलों में भी लग रही आग

पिछले कुछ सालों से देखा जा रहा है कि, मौसम में जरा सी गर्मी आई नहीं कि, उत्तराखंड में जंगल सुलग उठते हैं। पहले माना जाता था कि अगर जंगल में आग लगी तो बरसात में खबू घास उगेगी। इसलिए कुछ नासमझ लोग जंगल में खरपतवार जला देते थे। लेकिन देखा जा रहा है कि जिन जंगलों पास कोई गांव नहीं या गांव पलायन की पीड़ा भोग रहा है।

गांव की आबादी में जावानों की तादाद नहीं गांव में कोई दूधारू जानवर नहीं बावजूद इसके उस इलाके के जंगल सुलग रहे हैं। इस साल फायर सीजन के दौरान वनाग्नि की 575 घटनाएं हुई हैं। तमाम चौकसी और इंतजामात के बाद भी 482 हेक्टेयर इलाके में जंगल जलकर खाक हुआ है।

इनमें कई प्लांटेशन एरिया भी हैं, जहां जंगल की आग ने नुकसान पहुंचाया है। ऐसे हालातों में जंगलात महकमे ने पिछले साल की तरह इस साल भी फायर सीजन को एक पखवाड़े के लिए आगे बढा दिया है। दरअसल पहले फायर सीजन 15 फरवरी को शुरू होता था और 15 जून तक चलता था, लेकिन पिछले साल इसकी अवधि 30 जून तक बढ़ा दी गई थी। ठीक उसी तरह इस साल भी फायर सीजन को 30 जून तक बढ़ा दिया गया है।

हालांकि अच्छी बात ये है कि पिछले सात दिनों में कहीं से भी वनाग्नि की बुऱी खबर नहीं मिली है। बावजूद इसके फायर सीजन खत्म करने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि इस पर फैसला मानसून की स्थिति को देखकर लिया जाएगा। मानसून का आगाज झमाझम बारिश के साथ हुआ तो फायर सीजन के लिए चौकस जंगलात महकमे के जवान चैन की सांस ले सकते हैं।

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