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चापलूसी जमकर करो मगर ये गुंजाइश रहे, जब कभी नेताजी मिलें तो शर्मिंदा न हों…

धामी कैबिनेट में शामिल होते ही कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, नेगी हो गए। न जाने क्यों वे बत्रा से नेगी बने ये तो बेशक वो नहीं जानते होंगे लेकिन उनके वो शुभचिंतक जरूर जान गए हैं। जी हां यकीन मानिए ये बैनर बता रहा है कि चापलूसी की भी हद होती है लेकिन सियासी गलियारे में हदें पार हो जाती है. इसकी एक बानगी है देहरादून के रिस्पना पुल के ऊपर लगाया गया शुभकामनाओं वाला बैनर। जिसके जरिए नए विधायकों को धामी मंत्रीमंडल में शामिल होने की शुभकामनाएं दी गई है। लेकिन नेताओं की गुडबुक में जल्दी से जल्दी शामिल होने और अपने नंबर बढ़ाने के चक्कर में बधाई देने वालों ने कुछ भी नहीं देखा सही है या गलत छपा है इससे कोई वास्ता नहीं रखा लिहाजा नतीजा आपके सामने हैं बैनर के छपे मैटिरियल पर रूड़की विधायक प्रदीप बत्रा को प्रदीप नेगी बताया गया है।

जरा सोचिए जहां नाम और जाति के हथियारों से ही अक्सर राजनीति की जंग लड़ी जाती हो उस जगह नए कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा साहब पर क्या गुजर रही होगी। बोलने वालों ने तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को नहीं छोड़ा उन्हें भी बिहारी उनियाल बनाकर मीम बनाए तो प्रदीप बत्रा साहब का क्या होगा। जब रुड़की वाले देहरादून के इस बैनर को उन्हें दिखा कर पूछेंगे साहब कैबिनेट मंत्री बने या बत्रा से नेगी भी बन गए। खैर सियासत में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता लेकिन देखना ये दिलचस्प होगा कि जिस शुभचिंतक ने प्रदीप बत्रा साहब को बत्रा से नेगी बना दिया उस पर प्यार बरसाते हैं या गुस्सा। ये तो बैनर के सोशल मीडिया में दौड़ने के बाद ही पता चलेगा।

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