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देहरादून लिकर स्कैम: मल्होत्रा बंधुओं पर कार्रवाई के संकेत, राजनीतिक दबाव की चर्चा तेज

देहरादून में शराब कारोबार से जुड़े एक बड़े घोटाले ने आबकारी विभाग में हड़कंप मचा दिया है। चर्चा में आए शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा और गोलू मल्होत्रा पर बैंक गारंटी के नाम पर करोड़ों का खेल रचने का गंभीर आरोप लगा है। सूत्रों के अनुसार, इन्होंने आबकारी विभाग में जमा कराई गई बैंक गारंटी की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो केवल कागजों तक सीमित हो सकती है। यह मामला सामने आते ही विभागीय अधिकारी और बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। आबकारी व्यवस्था में बैंक गारंटी का महत्व बेहद अहम होता है, क्योंकि शराब ठेके आवंटन के समय ठेकेदारों से यह ली जाती है ताकि राजस्व समय पर जमा न होने पर विभाग इसे भुना सके। लेकिन अगर गारंटी ही फर्जी साबित हुई, तो सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो सकता है।

मामले की गहराई से पता चलता है कि मल्होत्रा बंधु राजनीतिक आकाओं के चक्कर काट रहे हैं और जांच के दायरे में आ चुके हैं। विभाग को चिंता है कि यदि देय राशि समय पर न जमा हुई और गारंटी अमान्य निकली, तो वसूली का कोई रास्ता नहीं बचेगा। यह घटना उत्तराखंड के शराब व्यापार की पारदर्शिता पर गहरा सवाल खड़ी कर रही है, जहां पहले भी कई अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। आबकारी अधिकारी अब इसकी तफ्तीश में जुटे हैं, लेकिन कारोबारियों की सक्रियता से साफ है कि मामला और गहरा सकता है। जनता में भी आक्रोश बढ़ रहा है, क्योंकि इससे राज्य के राजस्व को सीधा नुकसान पहुंचने का खतरा है। कुल मिलाकर, यह स्कैम न केवल विभागीय भ्रष्टाचार की बू देता है, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल का सख्त रुख

देहरादून शराब कारोबार में बैंक गारंटी घोटाले का मामला गरमा गया है। आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने दिनेश मल्होत्रा और गोलू मल्होत्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। विभाग फर्जी बैंक गारंटी की विस्तृत जांच कर रहा है और संबंधित बैंक से आधिकारिक पुष्टि मांगी जा रही है। यदि गड़बड़ी साबित हुई तो न सिर्फ कारोबारियों पर कठोर एक्शन होगा बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भी भूमिका जांचे जाने का आदेश है। शहर में चर्चा है कि मल्होत्रा बंधु राजनीतिक नेताओं से संपर्क कर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि ये दावे अभी आधिकारिक नहीं हैं। आबकारी विभाग में यह पहला बड़ा मामला है जो निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि बैंक गारंटी सिस्टम में खामी से सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो सकता है और ईमानदार व्यापारियों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा होगी। ठेका आवंटन के समय ली जाने वाली यह गारंटी राजस्व सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन फर्जीवाड़े से पूरा सिस्टम खतरे में पड़ जाता है। फिलहाल सभी की नजरें विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो यह उत्तराखंड शराब व्यापार का बड़ा घोटाला बन सकता है, वरना अफवाहें थम जाएंगी। लेकिन तब तक देहरादून के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का केंद्र बना रहेगा। जनता उम्मीद कर रही है कि पारदर्शी जांच से भरोसा कायम रहे और दोषी सजा पाएं।

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