देहरादून और हरिद्वार से दिल्ली यह अन्य राज्यों में जाने वाली निजी बस कंपनियों के लिए मिलने वाली ऑनलाइन टिकट के लिए जिस राज्य में बसों का संचालन होता है, वहां के स्थानीय परिवहन विभाग से कंपनी को एग्रीगेटर लाइसेंस बनवाना होता है। जिसके बाद ही टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है लेकिन उत्तराखंड में कई कंपनियां ऐसी है जो बिना एग्रीगेटर लाइसेंस के गलत तरीके से बसों की ऑनलाइन बुकिंग टिकट उपलब्ध कराती है जो मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-93 सपठित धारा-193 का उल्लंघन है जिसके चलते परिवहन विभाग ने Redubs, Paytm और Abhibus को नोटिस जारी करते हुए उन्हें जवाब के लिए 10 दिन का समय दिया गया है जबकि बस संचालक पर चालानी कार्रवाई की गई है और अब तक 170 से ज्यादा बसों के चालान काटे गए हैं।
ऑनलाइन बुकिंग के लिए एग्रीगेटर लाइसेंस अनिवार्य
इसी कड़ी में जब बीते दिनों देहरादून RTO की तरफ से बस कंपनियों के साथ-साथ ओला, उबर और रैपीडो जैसी बाइक और कार ट्रेवल सर्विस देने वाली कंपनी पर भी एग्रीगेटर लाइसेंस बनाने पर कार्रवाई की गई तो इनमें से ओला उबर और रैपीडो ने एग्रीगेटर लाइसेंस बनवाकर सभी मानकों को पूरा कर लिया। जबकि अभी भी राजधानी देहरादून में इन्हीं की तरह कई कंपनियां अभी ऐसी है जो देहरादून में ट्रैवल सर्विस प्रोवाइडर हैं लेकिन उन्होंने अब तक एग्रीगेटर लाइसेंस नहीं लिया है और उसके बिना ही ऑनलाइन बुकिंग की जा रही है। जिसके संबंध में भी आरटीओ देहरादून की तरफ से इन कंपनियों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है।
वहीं संभागीय परिवहन अधिकारी अनीता चमोला का कहना है कि देहरादून हरिद्वार और अन्य जगह से दूसरे राज्य में जाने वाली निजी कंपनियों की बसें बिना मानकों को पूरा किए संचालित हो रही थी जिस पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए बसों के चालान किए हैं साथ ही ऑनलाइन बुकिंग के लिए कुछ कंपनियों ने एग्रीगेटर लाइसेंस भी नहीं दिया था जिस पर तीन कंपनियों को नोटिस भी जारी किया गया है उनका कहना है कि अगर राज्य में कोई कंपनी ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से ट्रैवल सर्विस प्रदान कर रही है तो उन्हें एग्रीगेटर लाइसेंस लेना होता है लेकिन अगर कंपनी एग्रीगेटर लाइसेंस नहीं लेती तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





