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उत्तराखंड शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: नोटिस के 3 महीने बाद भी फर्जी शिक्षकों पर नहीं गिरी गाज

ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में शिक्षा विभाग फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले 40 सहायक अध्यापकों पर नरम रुख अपनाता दिख रहा है। नोटिस जारी होने के साढ़े तीन महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक इन शिक्षकों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि विभाग ने पहले इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का दावा किया था। इन शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश से डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षण लिया और बाद में उत्तराखंड का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर यहाँ नौकरी हासिल कर ली। फिलहाल विभाग दूसरे नोटिस के जवाब का इंतज़ार कर रहा है, जिससे सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

कैसे हुआ नियमों का उल्लंघन?

वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार के नियमानुसार, डीएलएड प्रशिक्षण के लिए वहां का स्थायी निवासी होना अनिवार्य था। इन 40 अभ्यर्थियों ने यूपी के निवासी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया, लेकिन वहां नौकरी न मिलने पर उत्तराखंड आ गए। यहाँ उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया और शपथ पत्र के आधार पर सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति पा ली।

कार्रवाई में देरी और विभाग का पक्ष

बीते वर्ष जिले में 309 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया में इन 40 शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने आया था। विभाग ने इन्हें 15 दिन के भीतर अपने मूल दस्तावेज पेश करने का समय दिया था, लेकिन यह समय सीमा बीतने के 90 दिन बाद भी मामला लटका हुआ है। प्रभारी सीईओ हरेंद्र मिश्रा का कहना है कि शिक्षकों के पहले जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं था, इसलिए अब दूसरा नोटिस जारी किया गया है। जवाब मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भर्ती प्रक्रिया के मुख्य आँकड़े

प्राथमिक शिक्षा विभाग में डीएलएड धारकों के लिए कुल 309 पद स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 256 लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जांच में पाया गया कि इन नियुक्तियों में 40 शिक्षक ऐसे शामिल हैं जिन्होंने दोनों राज्यों (यूपी और उत्तराखंड) के निवास प्रमाण पत्रों का अनुचित लाभ उठाकर सिस्टम को धोखा दिया है।

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