उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड के पारंपरिक मेलों का बनेगा ग्लोबल कैलेंडर: विंटर कार्निवल और रम्माण को दिया जाएगा नया रूप

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य के स्थानीय उत्पादों, समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक मेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को ठोस कार्ययोजना बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने ‘एक जिला एक महोत्सव’ योजना और राज्य से होने वाले निर्यात में बढ़ोतरी की समीक्षा की। इस योजना का सीधा उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, किसानों और कारोबारियों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने विशिष्ट उत्पादों, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय मेलों को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए व्यवस्थित योजना तैयार करे। उन्होंने मेलों को स्थायी पहचान देने और निर्यात में वृद्धि दर्ज करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने पर जोर दिया। शासन के इस कदम से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार और आजीविका के नए साधन विकसित होने की उम्मीद है।

नई नीति के तहत राज्य के हर जिले को अपने क्षेत्र के किसी एक प्रसिद्ध पर्व या मेले को चिन्हित कर उसे ‘एक जिला एक महोत्सव’ के रूप में विकसित करना होगा। इसके लिए सभी जनपदों को एक समर्पित वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, आयोजन को बड़े पैमाने पर सफल बनाने के लिए स्थानीय हितधारकों और संबंधित संस्थाओं को अनिवार्य रूप से इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

प्रशासनिक योजना के तहत उत्तराखंड के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध आयोजनों जैसे रम्माण फेस्टिवल, बटर फेस्टिवल, शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल-मसूरी विंटर कार्निवल, चंपावत इंटरनेशनल एंगलिंग मीट और उत्तरायणी मेले को और अधिक सुव्यवस्थित किया जाएगा। इन सभी पारंपरिक मेलों के दौरान साहसिक पर्यटन जैसी गतिविधियों को भी विशेष रूप से बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मुख्य सचिव ने सबसे पहले प्रत्येक जिले का प्रामाणिक बेसलाइन डेटा तैयार करने का आदेश दिया है। इसके अलावा स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, गुणवत्ता में सुधार, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और जीआई टैग प्राप्त उत्पादों के अधिक से अधिक व्यावसायिक उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।

राज्य स्तर पर निर्यात रणनीति को सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में उद्योग, वन, आयुष विभाग के सचिवों सहित अन्य प्रमुख हितधारकों को शामिल किया जाएगा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जनपदों में किए गए सफल प्रयोगों को आपस में साझा करें ताकि उन्हें पूरे राज्य में लागू किया जा सके।

Related Articles

Back to top button