उत्तराखंड

उत्तराखंड हाइड्रोपॉवर अपडेट: 6 बांधों की घटती जल क्षमता पर एक्शन में सरकार, बड़े पैमाने पर होगी सफाई

देहरादून। उत्तराखंड में मानसूनी बारिश के साथ नदियों में बहकर आ रही गाद ने राज्य के प्रमुख जल स्रोतों और बिजली परियोजनाओं के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार के नियंत्रण वाले छह प्रमुख बांधों और बैराजों की जल भंडारण क्षमता में 60 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक एके सिंह ने सोमवार को इस गंभीर स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि गाद जमा होने से पानी के संचयन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

यूजीवीएनएल प्रबंधन के अनुसार, हालांकि गाद जमने से फिलहाल बिजली उत्पादन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन बांधों की दीर्घकालिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य में केंद्र और निजी कंपनियों के बांधों के अलावा राज्य सरकार के अधीन आने वाले इन छह प्रोजेक्ट्स में गाद की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है

गाद जमा होने से सबसे बुरा प्रभाव देहरादून स्थित इछाड़ी बांध और उत्तरकाशी के मनेरी बांध पर पड़ा है। इछाड़ी बांध की मूल क्षमता में आधी से ज्यादा की कमी आ चुकी है

विभिन्न बांधों की मूल क्षमता और वर्तमान स्थिति की बात करें तो इछाड़ी बांध (1975) की मूल क्षमता 11.55 मिलियन घन मीटर थी, जो अब घटकर मात्र 4.68 रह गई है, मनेरी बांध (1984) की मूल क्षमता 6.0 थी, जो अब सिमटकर 1.99 रह गई है, डाकपत्थर बैराज (1965) की मूल क्षमता 0.71 से घटकर 0.61 रह गई है, पशुलोक बैराज (1980) की मूल क्षमता 8.10 से घटकर 6.88 रह गई है, जोशियाड़ा बांध (2008) की मूल क्षमता 0.75 से घटकर 0.56 रह गई है, जबकि व्यासी बांध (2022) की क्षमता 13.69 मिलियन घन मीटर पर यथावत बनी हुई है।

यूजीवीएनएल के प्रबंध निदेशक एके सिंह ने जानकारी दी कि गाद की इस समस्या से राज्य सरकार को अवगत करा दिया गया है। आमतौर पर सिल्ट बढ़ने पर फ्लशिंग तकनीक से सफाई की जाती है, लेकिन अब गहरे डी-सिल्टिंग कार्य की जरूरत है। सरकार से औपचारिक अनुमति मिलते ही बड़े पैमाने पर सफाई का काम शुरू कर दिया जाएगा

प्रबंध निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में बहती नदियों पर आधारित 21 जल विद्युत परियोजनाएं संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 1440 मेगावाट है। इन रनिंग रिवर प्रोजेक्ट्स में पानी के तेज बहाव के साथ गाद स्वतः ही आगे निकल जाती है, इसलिए वहां गाद जमा होना कोई स्थायी समस्या नहीं है।

Related Articles

Back to top button