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मसूरी लाइब्रेरी चौक पर 11 लाख की ट्रैफिक लाइटें एक साल से बंद, ट्रैफिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल – पर्यटक और स्थानीय परेशान

मसूरी के सबसे व्यस्त लाइब्रेरी चौक पर लगाई गईं करीब 11 लाख रुपये कीमत की आधुनिक ट्रैफिक लाइटें पिछले पूरे एक साल से पूरी तरह बंद पड़ी हुई हैं, जिसके कारण इस महत्वपूर्ण चौराहे पर रोजाना भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है और सड़क पर अव्यवस्था का माहौल छाया रहता है। स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों ने नगर पालिका प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभागों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है, क्योंकि लाखों रुपये के सरकारी खर्च के बावजूद कोई ठोस मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

ट्रैफिक सिग्नल पर भारी सरकारी खर्च, फिर भी खराबी की शिकार

मसूरी नगर पालिका द्वारा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाइब्रेरी चौक पर उच्च गुणवत्ता वाली ट्रैफिक सिग्नल लाइटें लगाई गई थीं, जिनकी कुल लागत लगभग 11 लाख रुपये बताई जा रही है। लेकिन ये सिग्नल चालू होने के महज कुछ ही महीनों बाद खराब हो गईं और तब से लगातार बंद हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों द्वारा केवल मौखिक आश्वासन ही दिए जाते रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ। इससे न केवल सरकारी धन का अपव्यय हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप भी लग रहे हैं।

जाम और दुर्घटना का खतरा बढ़ा, पर्यटकों व बच्चों को हो रही परेशानी

लाइब्रेरी चौक मसूरी शहर का हृदय स्थल है, जहां रोजाना सैकड़ों वाहन, पैदल यात्री, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र और पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर जा रहे पर्यटक गुजरते हैं। ट्रैफिक लाइटें बंद होने से चौराहे पर वाहनों का असमान प्रवाह हो रहा है, जिसके फलस्वरूप हर शाम और वीकेंड पर लंबा जाम लग जाता है। खासकर स्कूल के समय बच्चों और महिलाओं को सड़क पार करने में भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पर्यटक इस अव्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जाम के कारण उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है और सुरक्षा की दृष्टि से स्थिति और भी चिंताजनक है।

जिम्मेदार विभाग मौन, निरीक्षण के नाम पर टालमटोल

नगर पालिका, ट्रैफिक पुलिस और विद्युत विभाग जैसे संबंधित विभागों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल निरीक्षण का बहाना बनाकर समय बर्बाद कर रहे हैं, जबकि ट्रैफिक लाइटों को ठीक करने या अस्थायी रूप से मैनुअल ट्रैफिक प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं की गई। मसूरी जैसे पर्यटन नगरी में ऐसी लापरवाही न केवल शहर की छवि खराब कर रही है, बल्कि राज्य सरकार के ‘स्मार्ट सिटी’ और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दावों पर भी सवालिया निशान लगा रही है। स्थानीय प्रतिनिधियों से मांग उठ रही है कि जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

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