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बच्चों की नींद पूरी हो तो पढ़ाई चमकेगी: स्विस रिसर्च में खुलासा, 95% ने चुना देर का समय

हमारे यहां स्कूली शिक्षा पर बेहद कम रिसर्च होती है. हम नंबर गेम में व्यस्त रहते है । नतीजतन हम 99 फीसद मार्क्स का बोझ हम अपने बच्चों पर लाद देते हैं। हालांकि व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो प्राइमरी एजुकेशन के 99 फीसद मार्क्स कहीं काम नहीं आते। उधर विदेशों में शिक्षा को लेकर सरकारें बेहद संजीदा हैं। आए दिन कोई न कोई रिसर्च सामने आती है जिसके रिजल्ट हमें चौका देते हैं।

बच्चों की शिक्षा पर ताजा रिसर्च स्वीट्जरलैंड में हुई. स्वीट्जरलैंड के ज्यूरिख विश्वविद्यालय के नए अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे नींद पूरी कर स्कूल में हाजिर होते हैं उनकी सेहत अच्छी रहती है और पढाई के नतीजे भी बेहतर मिलते हैं। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने बच्चों को स्कूल टाइम में बदलाव के साथ विकल्प दिया। दिए गए वक्त में पूरा एक घंटे का फर्क था।
रिसर्च में शामिल तकरीन 95 फीसद बच्चों ने देर से आने का विकल्प चुना। जिसके चलते बच्चों को रोजमर्रा के मुकाबले 40 मिनट ज्यादा सोने को मिला जिससे उनकी नीद काफी हद तक पूरी हुई।

नतीजा ये हुआ कि नीद पूर कर स्कूल आने वाले बच्चों को जहां पढाई ज्यादा समझ में आई वहीं उनका स्वास्थ्य भी बेहत्तर दिखाई दिया। मतलब साफ है कि अगर स्कूल सुबह देर से खुलेगा तो बच्चों की नींद पूरी होगी। इस टाइमिंग में बदलाव के नतीजे सकारात्मक दिखाई देंगे। बहरहाल देखना ये दिलचस्प होगा कि स्वीट्जरलैंड में हुई रिसर्च से किन-किन मुल्कों के बच्चों को फायदा मिलता है।

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