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उत्तराखंड में मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली: लैंसडाउन में लगा नया डॉप्लर रडार

केंद्र सरकार उत्तराखंड में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर पिघलने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा लोकसभा में उठाए गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई। राज्य में अब मौसम की सटीक जानकारी के लिए स्वचालित मौसम स्टेशनों (AWS) की संख्या बढ़ाकर 31 कर दी गई है, जिससे दुर्गम इलाकों में भी निगरानी आसान होगी।

लैंसडाउन में नया डॉप्लर वेदर रडार स्थापित

राज्य में सटीक पूर्वानुमान के लिए लैंसडाउन में एक नया डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किया गया है। इसके साथ ही अब उत्तराखंड में कुल तीन डॉप्लर रडार संचालित हो रहे हैं। ये रडार भारी बारिश, बादल फटने और अन्य मौसमी बदलावों की तत्काल जानकारी देने में सक्षम हैं, जिससे आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।

तकनीकी नवाचार और केदारनाथ में विशेष निगरानी

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने एक समग्र बहु-जोखिम पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की है, जिसमें उन्नत पूर्वानुमान मॉडल और GIS आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली शामिल है। विशेष रूप से केदारनाथ जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वचालित मौसम प्रेक्षण प्रणाली स्थापित की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय जल आयोग हिमालयी राज्यों में 24 घंटे पहले ही अल्पकालिक बाढ़ का पूर्वानुमान जारी कर रहा है।

इसरो (ISRO) के माध्यम से ग्लेशियरों की निगरानी

ग्लेशियरों की स्थिति पर नजर रखने के लिए अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसरो के माध्यम से उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का इस्तेमाल कर हिमालयी ग्लेशियरों के आकार, विस्तार और उनकी गतिशीलता की नियमित निगरानी की जा रही है। इससे ग्लेशियर टूटने या झील बनने जैसी संभावित आपदाओं का समय रहते पता चल सकेगा।

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