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धामी सरकार का बड़ा फैसला: मामूली तकनीकी गलतियों पर जेल की सजा खत्म, जुर्माने की राशि बढ़ी

उत्तराखंड की धामी सरकार ने विधानसभा में ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक-2026’ पेश किया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य छोटे और तकनीकी अपराधों के लिए जेल भेजने के बजाय आर्थिक दंड यानी जुर्माने को प्राथमिकता देना है। इस विधेयक के पारित होने के बाद कई नियमों में बदलाव आएगा, जिससे मामूली गलतियों पर अब तीन महीने तक की जेल नहीं होगी, बल्कि उसकी जगह भारी जुर्माना देना होगा। साथ ही, यह प्रावधान भी किया गया है कि हर तीन साल में जुर्माने की राशि में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी।

आर्थिक दंड और जेल की अवधि में बदलाव

नए विधेयक के तहत ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण का गलत लाभ लेने वालों को अब जेल नहीं जाना होगा, बल्कि उन पर 40,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह, प्लास्टिक कचरा अधिनियम और मलिन बस्ती सुधार अधिनियम के तहत होने वाले उल्लंघनों में जेल की सजा को घटाकर क्रमशः एक माह और तीन माह कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया का बोझ कम होगा और छोटे मामलों में सुधार की गुंजाइश बढ़ेगी।

पर्यावरण और कृषि नियमों पर सख्ती

सरकार ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जुर्माने की राशि को काफी बढ़ा दिया है। नदी घाटी विकास और प्रदूषण से जुड़े नियमों को तोड़ने पर अब पहली बार में ही 2,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। जैविक कृषि नियमों के उल्लंघन पर यह जुर्माना 50,000 से लेकर 5 लाख रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा, फल पौधशाला अधिनियम के उल्लंघन पर भी एक लाख से पांच लाख रुपये तक के भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।

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