राजभवन का नाम “लोकभवन” रखने पर विवाद, आदि शंकराचार्य ने उठाई आपत्ति

उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा प्रारंभ होने में कुछ ही समय शेष है लेकिन, उससे पहले धर्मनगरी हरिद्वार में राजभवन का नाम “लोकभवन” रखने पर विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, आदि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गुरुवार सुबह हरिद्वार के मुक्तेश्वर स्थित आनंद नमामि गंगे घाट पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा पूजन कर संकल्प लिया और फिर धर्म और शासन से जुड़े कुछ तीखे सवाल उठाए। चूंकि हाल ही में राज्य सरकार ने राजभवन का नाम बदलकर “लोक भवन” रखने का निर्णय लिया था लिहाजा, इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर “राज” शब्द से आपत्ति है और भवन को “लोक भवन” कहा जा रहा है, तो फिर वहां आम जनता के आने-जाने पर रोक क्यों हैं ? वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री आवास का नाम “तीर्थ” रखे जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि “तीर्थ” शब्द का प्रयोग धार्मिक स्थलों के लिए होता है, किसी शासन या राजनीतिक भवन के लिए नहीं। इतना ही नहीं शंकराचार्य ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखने की भी बात सामने रखी। आदि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनुसार, धार्मिक शब्दों का सम्मान उनकी नियत स्थान पर होना चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
आदि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के इन बयानों से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ चुकी है, हालाांकि, सरकार की ओर से अभी इस मुद्दे पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बहरहाल, उत्तराखंड में धर्म और शासन के इस तीखे वाद-विवाद ने एक बार फिर नामकरण की राजनीति के हंगारों को हवा दे दी है, अब देखना यह होगा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार की ओर से कब और कौन सी नई प्रतिक्रिया सामने आती है।




