
उत्तराखंड के गठन से लेकर वर्तमान समय में राज्य के विकास में महिलाओं की भी परस्पर भागीदारी रही है, उत्तराखंड में आर्थिकी को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मसम्मान सहित दक्षता प्रदान करने के लिए सरकार की लखपति दीदी योजना गेम चेंजर साबित हो रही है। आपको बता दें कि वर्तमान समय में राज्य की ढाई लाख से भी अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं जिनकी सालाना आय एक लाख रुपये से भी अधिक है। उत्तराखंड में महिलाओं की भागिदारी को सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बनाने में सबसे बड़ा योगदान केंद्र सरकार द्वारा पोषित स्वयं सहायता समूहों का है। वर्तमान समय में केंद्र एवं राज्य सरकार के आजीविका मिशन के तहत 68 हजार से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में पांच लाख से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। यह योजना कृषि, हस्तशिल्प और अन्य आर्थिक गतिविधियों में प्रशिक्षण देकर महिलाओं को सशक्त कर रही है, जिससे उनकी आजीविका में सुधार हो रहा है। इस सिलसिले में सरकार की ओर से ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश भी जारी किए गए हैं।
CM धामी की योजना, 2.54 लाख दीदी बनीं लखपति
उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय संसाधनों से उत्पाद बना रही हैं, जिससे उनका सशक्तीकरण हो रहा है। CM पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 2022 से चल रही लखपति दीदी योजना में महिलाओं को कृषि-उद्यान, सिलाई-कढ़ाई, रसोई गैस वितरण, पशु चिकित्सा, बीमा और डिजिटल लेनदेन का प्रशिक्षण देकर आजीविका से जोड़ा जा रहा है। दिसंबर 2025 तक 2.54 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से अधिक है। चालू वित्तीय वर्ष में 1.20 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 91,445 महिलाएं सफल हुई हैं। समूह उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने से योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिला समूहों की आजीविका को बढ़ाने के लिए अगस्त, 2023 से मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना भी लागू की गई। वर्तमान में 35 हजार से ज्यादा महिलाएं इसका लाभ उठा रही हैं। योजना के तहत अब तक 9.11 करोड़ का कारोबार महिला समूह कर चुके हैं।




