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उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स की नई पहल: साइबर जागरूकता व्हाट्सएप कम्युनिटी तैयार, हर परिवार से जोड़ा जाएगा एक सदस्य

उत्तराखंड में लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने जागरुकता को ही सबसे बड़ा हथियार बनाने की रणनीति अपनाई है। ऑनलाइन ठगी के लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत अधिक से अधिक नागरिकों—खासकर वरिष्ठ नागरिकों—को सीधे जोड़कर साइबर अपराधियों के तरीकों से अवगत कराया जाएगा।

एसटीएफ के एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत आम लोगों की जागरूकता की कमी है। लोग ठगी के नए-नए तरीकों, फर्जी कॉल, लिंक और डिजिटल जालसाजी की कार्यप्रणाली (मोडस ऑपरैंडी) को समय रहते नहीं पहचान पाते, जिसका फायदा उठाकर अपराधी उन्हें निशाना बना लेते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए एसटीएफ पहले से एक व्हाट्सएप ब्रॉडकास्टिंग कम्युनिटी चला रही है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को जोड़ा गया है। अब योजना है कि प्रदेश के हर परिवार से कम से कम एक सदस्य इस कम्युनिटी का हिस्सा बने। इसके लिए एक सीयूजी नंबर जारी किया गया है, जिस पर संदेश भेजकर लोग खुद को इस जागरूकता अभियान से जोड़ सकते हैं।

इस ब्रॉडकास्टिंग कम्युनिटी के माध्यम से रोज सुबह-शाम साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों की जानकारी साझा की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग समय रहते इन तकनीकों को समझ लें, तो वे न केवल खुद को बल्कि अपने परिवार और परिचितों को भी साइबर ठगी से बचा सकते हैं। एसटीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें, क्योंकि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे प्रभावी बचाव है।

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