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उत्तराखंड में शुरू हुआ पहला घरेलू आय सर्वेक्षण

उत्तराखंड में राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण’ की शुरुआत कर दी है। यह देश में अपनी तरह का पहला सर्वे है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रत्येक परिवार की आर्थिक स्थिति का सही आकलन करना है। सर्वे के दौरान सांख्यिकी अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगी। यह कदम ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा आधार माना जा रहा है, जिससे देश की वास्तविक आय का सटीक पता चल सकेगा।

सर्वे की समयसीमा और कार्य प्रणाली

यह सर्वेक्षण आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है और मार्च 2027 तक जारी रहेगा। विभाग की टीमें अगले एक साल से भी अधिक समय तक फील्ड में सक्रिय रहेंगी। टीम के सदस्य प्रत्येक घर का दौरा करेंगे और परिवार के सदस्यों से बातचीत कर उनकी आय के विभिन्न स्रोतों की जानकारी लेंगे। सांख्यिकी विभाग के उप निदेशक नीतीश कुमार मिश्रा के अनुसार, इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

किन आय स्रोतों पर रहेगा फोकस?

इस सर्वे का मुख्य लक्ष्य केवल कुल आय जानना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि पैसा कहाँ से आ रहा है। इसमें मुख्य रूप से चार क्षेत्रों से होने वाली कमाई का डेटा तैयार किया जाएगा:

  • वेतन (Salary): नौकरीपेशा लोगों की मासिक आय।
  • कृषि (Agriculture): खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों से होने वाली कमाई।
  • व्यवसाय (Business): छोटे-बड़े व्यापार और स्वरोजगार से प्राप्त लाभ।
  • मजदूरी (Labor): दैनिक मजदूरी या अन्य शारीरिक श्रम से होने वाली आय।

सर्वे का मुख्य उद्देश्य

सरकार इस डेटा के जरिए यह समझना चाहती है कि उत्तराखंड और देश के नागरिकों की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है। जब हर परिवार की आय का सटीक डेटा उपलब्ध होगा, तो भविष्य की योजनाएं और नीतियां बनाने में आसानी होगी। यह डेटा देश की जीडीपी और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को और अधिक विश्वसनी

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