
बीते पांच वर्षों (2020-2025) के आंकड़े बताते हैं कि देश भर के बैंकों ने आम ग्राहकों से सेवा शुल्कों के नाम पर भारी वसूली की है। न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) न रखने, एटीएम से तय सीमा से ज्यादा निकासी करने और एसएमएस अलर्ट जैसी सुविधाओं के नाम पर ग्राहकों के खातों से 14,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि काटी गई है। एक तरफ जहां बैंक छोटे ग्राहकों से इन शुल्कों के जरिए अपना राजस्व बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े कर्जों की माफी (Right-off) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पांच साल का लेखा-जोखा
आंकड़ों के अनुसार, अकेले न्यूनतम बैलेंस न रखने पर करीब 11,500 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। इसके अलावा, एसएमएस चार्ज के तौर पर 5,700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि काटी गई। निजी बैंकों ने इन शुल्कों की वसूली में सबसे ज्यादा सक्रियता दिखाई है।
ग्राहक इस जुर्माने से कैसे बच सकते हैं?
खबर में यह भी बताया गया है कि यदि ग्राहक बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) या प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाता खुलवाते हैं, तो उन्हें न्यूनतम बैलेंस रखने की अनिवार्यता से मुक्ति मिल सकती है। ऐसे खातों पर कोई शुल्क नहीं लगता, हालांकि इनमें महीने में केवल चार बार ही पैसे निकालने जैसी कुछ सीमाएं निर्धारित होती हैं।




