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ईरान संकट में फंसे 3000 भारतीय मेडिकल छात्र , सरकार से स्थानांतरण की मांग

पश्चिम एशिया, विशेषकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने ईरान में पढ़ रहे लगभग 3,000 भारतीय मेडिकल छात्रों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। पिछले एक साल में इन छात्रों की पढ़ाई तीन बार बाधित हो चुकी है। हालात इतने अस्थिर हैं कि छात्र अब वापस जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। अनिश्चितता के इस माहौल में अब छात्र और उनके परिवार भारत सरकार से हस्तक्षेप की उम्मीद लगा रहे हैं, ताकि उन्हें किसी सुरक्षित देश में अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी करने की अनुमति मिल सके।

अभिभावकों में डर और छात्रों की असुरक्षा

ईरान में जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी के अनुसार, संघर्ष विराम (सीजफायर) की खबरों के बावजूद जमीनी स्तर पर डर का माहौल बना हुआ है। ईरान की वर्तमान स्थितियों को देखते हुए कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को वापस भेजने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। छात्रों का कहना है कि उन्हें अब वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा है, और इस वजह से उनकी डिग्री पूरी होने में दो साल की अतिरिक्त देरी होने की संभावना है।

इंटरनेट बंद होने से बढ़ा संकट

पढ़ाई प्रभावित होने का एक बड़ा कारण ईरान में इंटरनेट का पूरी तरह बंद होना भी है। फरवरी में एडवाइजरी जारी होने के बाद कई छात्र परीक्षा छोड़कर भारत लौट आए थे। उन्हें उम्मीद थी कि वे भारत में रहकर ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपना सेमेस्टर पूरा कर लेंगे, लेकिन इंटरनेट सेवाएं ठप होने के कारण अब उनकी ऑनलाइन पढ़ाई भी बंद हो गई है। अप्रैल में शुरू होने वाले नए सेमेस्टर और लंबित परीक्षाओं को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।

सरकार से राहत की गुहार

छात्रों की मुख्य मांग यह है कि भारत सरकार इस गंभीर मामले में तुरंत दखल दे। छात्र चाहते हैं कि सरकार उन्हें किसी अन्य सुरक्षित विकल्प या देश में स्थानांतरित (Shift) करने की अनुमति प्रदान करे, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद न हो और वे बिना किसी डर के अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर सकें। फिलहाल, केरल और जम्मू-कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों के छात्र अपनी भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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